आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे के लिए अधिग्रहीत जमीन का कम मुआवजा देने का आरोप लगा एक किसान ने मंगलवार को तहसील परिसर में आत्मदाह का प्रयास किया। एसडीएम कोर्ट के सामने उसने खुद पर मिट्टी का तेल उड़ेलकर जैसे ही माचिस निकाला वहां मौजूद सुरक्षा गार्डो व वकीलों ने उसे दबोच लिया। मिट्टी तेल से भीगे किसान को आनन फानन में मेडिकल कालेज के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया।
ठठिया कसबा निवासी सोनेलाल राठौर (60) के मुताबिक एक्सप्रेस वे के निर्माण के लिए जिला प्रशासन ने उसकी तीन बीघा उपजाऊ जमीन चिन्हित की थी। बैनामा के समय उससे जमीन तो ले ली गई, लेकिन मुआवजा सिर्फ दो बीघा जमीन का दिया गया।
मुआवजे के रूप में उसे आठ लाख 42 हजार रुपये ही दिया गया। एक बीघा जमीन की कीमत चार लाख 21 हजार रुपये उसे नहीं दी गई। इस एक बीघे के मुआवजे के लिए वह पिछले तीन माह से तहसील व कलेक्ट्रेट के निरंतर चक्कर लगा रहा है।
इसके बाद भी उसे मुआवजा नहीं दिया गया। इससे क्षुब्ध होकर उसने आत्मदाह का निर्णय लिया। मंगलवार को वह तहसील कार्यालय पहुंच कर खुद पर मिट्टी का तेल उड़ेल लिया और जेब से माचिस निकाल रहा था तभी वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों की निगाह पड़ गई।
सुरक्षाकर्मियों ने दौड़ कर उससे माचिस छीन लिया। आनन फानन में किसान सोनेलाल को मेडिकल कालेज भेजा गया। जांच के बाद इमरजेंसी प्रभारी डा. दिलीप सिंह ने बताया कि किसान पूरी तरह स्वस्थ है। शरीर में आग लग नहीं पाई थी। उसे मेडिकल कालेज में ही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रखा गया है।
उधर एसडीएम महेश चंद्र शर्मा का कहना है कि सोनेलाल की जितनी जमीन ली गई थी, उसे मुआवजा दिया जा चुका है। वह अपने भाइयों के हिस्से की एक बीघा बाकी जमीन का भी अधिग्रहण में शामिल कराना चाहता है। किसान का आरोप बेबुनियाद है।