डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के बैनर तले लगातार दूसरे
दिन भी डिप्लोमा इंजीनियरों ने कामकाज ठप रखा और हाथों पर काली पट्टी
बांधकर प्रदर्शन किया। आरोप लगाया कि सरकार तानाशाही रवैया अपनाए है।
इंजीनियरों को 4800 ग्रेड पे देने की बजाय हीलाहवाली कर रही, जो बरदाश्त
नहीं किया जाएगा। अब इंजीनियर आरपार की लड़ाई के लिए कमर कस चुके हैं।
डिप्लोमा
इंजीनियर्स महासंघ के जिलाध्यक्ष राममहेश वर्मा, जिला सचिव मकरंद सिंह की
अगुवाई में कई विभागों के इंजीनियर कार्य बहिष्कार करते हुए शुक्रवार को
सरायमीरा तिर्वा क्रासिंग के पास निर्माणाधीन रेलवे ओवर ब्रिज के पास बने
सेतु निगम के कार्यालय में इकट्ठा हुए। यहां सरकारी रवैए की आलोचना की गई।
इंजीनियर दशरथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में सभी सदस्यों ने कोई
शासकीय कार्य न करने की शपथ ली। विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिया गया कि 24
फरवरी तक यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी तो 25 फरवरी को सभी घटक दलों
के डिप्लोमा इंजीनियर बेमियादी हड़ताल पर चले जाएंगे।
बैठक के बाद
इंजीनियरों ने नारेबाजी की और एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि इस बार
हक लेकर ही रहेंगे। उधर, इंजीनियरों के कार्य बहिष्कार का असर विकास
कार्यों पर भी पड़ा। मीडिया प्रभारी जेई सुनील आनंद ने बताया कि नाली,
सड़क, पुल, रोड, आवासीय भवन से लेकर कई विकास कार्यों की गति पर ब्रेक भी
लगा।
नए विकास कार्यों के लिए स्टीमेट बनाकर पेश करने की प्रक्रिया पर भी
ब्रेक लग गया है। उन्होंने विकास कार्य बाधित होने के लिए शासनादेश जारी
करने में देरी पर सरकार को जिम्मेदार ठहराया। प्रदर्शन के दौरान इंजीनियर
अशोक सिंह, वृजेश कुमार, कौशल किशोर, अनिल सचान, दीपक कुशवाह, गुरुचरण सिंह, सौरभ शुक्ला आदि मौजूद थे।