जिला अस्पताल के कर्मचारियों ने बुधवार को मानदेय के लिए हड़ताल कर दी। इससे वहां के हालात बिगड़ गए। दोपहर 12 बजे तक ओपीडी नहीं चली। सीएमएस के आश्वासन पर कर्मचारी काम पर लौटे।
जिला अस्पताल में लखनऊ की कार्यदायी संस्था अवनी परिधि के तहत पैरामेडिकल के 43 कर्मचारी कार्यरत हैं। इन्हें सात माह से मानदेय नहीं दिया गया है। इसको लेकर कर्मचारियों ने बुधवार को स्वास्थ्य सेवाएं बाधित कर गेट के बाहर प्रदर्शन किया। मरीज गेट के बाहर बैठकर हड़ताल समाप्त होने की प्रतीक्षा करते दिखे।
मानदेय के लिए कर्मचारी प्रत्येक माह सीएमएस व जिलाधिकारी को अपनी समस्याएं बताते रहे, लेकिन उनकी समस्या का निदान नहीं हो सका। बुधवार को जिला अस्पताल के कर्मचारी सुबह आठ बजे से अस्पताल गेट के बाहर नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गए। कर्मचारियों के धरने पर बैठ जाने से आने वाले मरीजों का ओपीडी के तहत रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका। इससे मरीज न तो डाक्टरों को दिखा सके और नहीं दवा ले सके। इससे मरीज भी गेट पर हड़ताल समाप्त होने की प्रतीक्षा करने लगे। दोपहर 12 बजे तक हड़ताल चलने के कारण ओपीडी में बैठे डाक्टर केवल उन्हीं मरीजों को देखते रहे जिनके पास ओपीडी का पर्चा था।
पर्चे में दवा लिखने के बाद दवा वितरण कक्ष में मौजूद फार्मासिस्ट ने उन्हें दवा दी। यही नहीं दोपहर 12 बजे तक पोस्टमार्टम हाउस में भी सन्नाटा पसरा रहा। अस्पताल परिसर में मरीजों की भारी भीड़ लग गई। स्वास्थ्य सेवाएं चरमराती देख सीएमएस डा. सीपी सिंह ने कुछ कर्मचारियों को बुलाकर हड़ताल समाप्त करने को कहा लेकिन कर्मचारी नहीं तैयार हुए।
बाद में उन्होंने लिखित आश्वासन दिया कि 23 जनवरी तक उनका सात माह का भुगतान करा दिया जाएगा। इस आश्वासन के बाद कर्मचारी काम पर लौट गए। 12 बजे के बाद ओपीडी शुरू होते ही रजिस्ट्रेशन काउंटर सहित अन्य कक्षों में मरीजों की भीड़ लग गई। धरना-प्रदर्शन में तौफीक खान, कमलेश कुमार, मनोज, आनंद मोहन, सीता, मीरा, रीमा, मानसिंह, देवेश कुमार, संजीव कुमार, प्रहलाद, फैसल, स्वदेश, रमेश, निर्मेश, कुंवर सिंह, अमित, आदि रहे।