कन्नौज। जिला अस्पताल में गुरुवार को बिजली संकट के कारण स्वास्थ्य व्यवस्थाएं चरमरा गईं। सुबह 5:30 बजे 11 हजार की लाइन में फाॅल्ट से तार टूट गए। 12 घंटे तक अस्पताल उमस और घुटन से जूझता रहा। एसएनसीयू में भर्ती नवजातों और जच्चा-बच्चा वार्ड की महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी हुई। पंखे बंद होने से मां हाथ के पंखों से हवा करती दिखीं। वार्ड छोड़ फर्श पर मासूम और तीमारदार आ गए।
जिला अस्पताल के पीछे पोल में फाॅल्ट के बाद नियमित बिजली आपूर्ति ठप हो गई। जनरेटर से व्यवस्था संभालने की कोशिश की गई लेकिन उमस भरी गर्मी के आगे यह नाकाफी साबित हुई। वार्डों में मरीज पसीने से तरबतर रहे। नवजातों की बेचैनी बढ़ने पर परिजनों की चिंता भी साफ दिखाई दी। एसएनसीयू में भर्ती बच्चों के परिजन बार-बार वार्ड के बाहर निकलते रहे। कोई बच्चे को गोद में लेकर हवा करता दिखा तो कोई हाथ के पंखे से राहत पहुंचाने की कोशिश करता रहा।
जच्चा-बच्चा वार्ड के बाहर कई महिलाएं मासूमों को लेकर बैठी रहीं। वार्ड के भीतर की घुटन बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था। मरीजों ने बताया कि बिजली समस्या यहां नई नहीं है। कई पंखे भी खराब पड़े हैं। बिजली गुल होने पर मरीजों और तीमारदारों की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है। शेखाना मोहल्ला निवासी कस्तूरबा अपने बच्चे को फर्श पर लिटाकर बैठी थीं। उनकी ननद गुल्फिशा हाथ से पंखा झल रही थीं। बेहटा निवासी रामकृष्ण नवासे को दफ्ती से हवा करते रहे। जिला अस्पताल वार्ड नंबर दो में भर्ती चंदाबानो को उनकी बेटी साइबीन लगातार पंखा कर राहत देने का प्रयास करती रही।
वर्जन
सुबह बिजली आपूर्ति बाधित होने के बाद तत्काल जनरेटर चालू करा दिया गया था। अस्पताल की आवश्यक सेवाएं जनरेटर से संचालित होती रहीं। बीच-बीच में डीजल भरवाने और तकनीकी कारणों से कुछ देर के लिए व्यवधान आया हो सकता है लेकिन मरीजों के इलाज और जरूरी सेवाओं को प्रभावित नहीं होने दिया गया। विद्युत निगम की टीम फाॅल्ट ठीक करने में लगी रही, जिसके बाद आपूर्ति बहाल हुई।
-डॉ.जीएन द्विवेदी सीएमएस