गोशाला में सूखा भूसा खाते गोवंश।
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कन्नौज। प्रदेश सरकार के आदेश के बाद जिले में गोशालाओं के निरीक्षण का अभियान शुक्रवार को शुरू हो गया। जिले के हर ब्लाक के नोडल अफसर पशु चिकित्सा विभाग की टीम के साथ गोशालाओं का हाल देखने और रिपोर्ट तैयार करने में लगा दिए गए हैं। वहीं जिले से नामित नोडल अफसर डॉ. एसएस पवार भी शुक्रवार को आ गए। पहले दिन उन्होंने गोशालाओं के आंकड़े और व्यवस्था के बारे में अफसरों से बातचीत की। साथ ही अफसरों को शासन की मंशा की भी जानकारी दी। जिले की गोशालाओं का हाल ठीक नहीं है। इससे कई की गर्दन नप सकी है।
गोशालाओं और पशु आश्रय स्थलों का निरीक्षण कर आख्या जुटाने के लिए आठ नोडल अफसर और उनके साथ न्यूनतम दो टीमें लगाई गई हैं। प्रभारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. संजय शाल्या ने बताया कि अभियान दस दिन तक चलेगा। इसके बाद रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी। शासन कार्रवाई या बजट के बारे में निर्णय लेगा। नोडल अफसर निरीक्षण कर स्थिति देखेंगे। इधर, अमर उजाला टीम ने तिर्वा तहसील के उमर्दा ब्लाक और तालग्राम में गोशाला की पड़ताल की।
गोवंशों को नहीं मिल रहा हरा चारा
तिर्वा। उमर्दा ब्लाक के बेहटा गांव की गोशाला में शुक्रवार को करीब 74 गोवंश बंधे थे। नाद में हरा चारा नहीं था। नाद में सूखा भूसा पड़ा था। बताया गया कि एक गोवंश की सुबह मौत हो गई। चार बीमार हैं। केयर टेकर खलील ने बताया कि गोशाला में हरे चारे की व्यवस्था नहीं है। सूखा भूसा खिलाया जा रहा है। इस मामले में बीडीओ अखिलेश तिवारी से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि चरागाह की भूमि उपलब्ध न हो पाने से हरे चारे की व्यवस्था नहीं हो पाई है। गोवंश के मौत की जानकारी नहीं है। मौके पर संबंधित सचिव को भेजकर गोवंश का पंचनामा भराकर अंतिम संस्कार कराएंगे। साथ ही पशु विभाग के डॉक्टरों से बीमार गोवंश के इलाज के लिए कह दिया गया है।
लापरवाही के चलते गायब हो गए गोवंश
तालग्राम। लापरवाही के चलते टिकरी कलसान की गोशाला से गोवंश गायब हो गए। दो माह से विकास खंड तालग्राम की टिकरी कलसान गोशाला खाली है। जिम्मेदार भी निरीक्षण करने नहीं पहुंचे। यह कागजों में चल रही है। अन्ना गोवंशों के झुंड किसानों के खेतों की फसलों को खाकर पेट भर रहे हैं। टिकरी कलसान ग्राम पंचायत की गोशाला का निर्माण वर्ष 2018 में कराया गया था। संचालन भी शुरू हुआ। इलाके के करीब 20 अन्ना गोवशों को बंद किया गया था। कुशलपुर्वा की हाट बाजार की अस्थायी गोशाला से 22 गोवशों को यहां लाया गया था। किसी समय इस गोशाला में 42 मवेशियों को शरण मिली थी। धीरे-धीरे गोवंश गायब हो गए। कुछ भूखे, प्यासे काल के गाल में समा गए। इस समय गोशाला गोवंशों से खाली है। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ भूख, प्यास से मर गए। कुछ को छोड़ दिया गया। यहां मौके पर केयर टेकर भी नहीं मिला। पानी के इंतजाम के लिए लगी सौर ऊर्जा की प्लेट गायब हो गई। हैंडंपप खराब है। पानी की बनी हौदी सूखी पड़ी है। जगह-जगह गंदगी है। देखरेख करने वाला कोई नहीं दिखा।