कन्नौज। जिले के भूजल दोहन क्षेत्र घोषित तालग्राम और जलालाबाद ब्लॉक में नहर परियोजना 10 साल से अधूरी है। सपा शासनकाल में 161 करोड़ रुपये से शुरू हुई यह परियोजना हजारों बीघा जमीन को सींचने वाली थी पर आज भी किसान पानी के इंतजार में हैं और उनकी फसलें खेतों में सूख रही हैं। यह परियोजना सिर्फ फाइलों में दौड़ती रही जबकि खेतों पर सूखा पड़ा रहा।
बेवर से जलालाबाद तक विस्तारित इस सिंचाई परियोजना का लक्ष्य भूजल स्तर सुधारना था। 10 साल और करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी यह परियोजना अंतिम छोर तक नहीं पहुंची है। निर्माण की धीमी गति भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम है। किसानों का कहना है कि बढ़ते डीजल दाम और गिरते जल स्तर से सिंचाई पंप मुश्किल है। बिरौली निवासी राकेश चंद्र ने बताया कि पानी की उम्मीद में जमीनें दी थीं, पर अब धूल उड़ रही है। फसलें सूख रही हैं और सरकार केवल तारीखें दे रही है। यह परियोजना विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है। अधिशासी अभियंता सूर्यमणि सिंह के अनुसार, वन विभाग के अनापत्ति प्रमाण पत्र न मिलने से काम अटका था।
भूजल स्तर का संकट
तालग्राम और जलालाबाद दोनों ब्लॉक भूजल दोहन क्षेत्र में हैं। यहां भूजल का दोहन क्षमता से अधिक है। नहर ही सिंचाई का सहारा थी पर पानी न आने से किसान निजी नलकूपों पर निर्भर हैं। इससे लागत बढ़ रही है और भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। हजारों बीघा फसल सिंचाई के अभाव में मुरझा रही है, जिससे किसानों पर आर्थिक संकट है।
परियोजना में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
सपा शासनकाल में शुरू हुई इस परियोजना पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। पूर्व सपा विधायक अरविंद सिंह यादव ने भाजपा सरकार पर लोक कल्याणकारी परियोजनाएं रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पांच साल में सरकार अधूरा काम पूरा नहीं करा पाई।
वर्जन
वन विभाग की एनओसी न मिलने की वजह से प्रोजेक्ट अटका था। अब काम पूरा हो गया है। नरौरा बांध से आज पानी छोड़ा गया है। इसी हफ्ते नहर में पानी छोड़ दिया जाएगा, तब किसानों को सिंचाई की दिक्कत नहीं होगी।
-सूर्यमणि सिंह, अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड