कन्नौज। सरकार का सरकारी अस्पतालों में मुफ्त चिकित्सा सेवाएं देने का दावा झूठा साबित हो रहा है। जिला अस्पताल और 100 शैया छिबरामऊ अस्पताल में बीते दो साल से टिटनेस का इंजेक्शन नहीं है। मरीजों के अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सक परिजनों से बाहर से मंगवाकर इंजेक्शन लगाते हैं। यह समस्या तब और गंभीर होती है, जब कोई अज्ञात या फिर अचेत अवस्था में पहुंचता हैं। साथ में किसी के न होने पर चिकित्सक बगैर टिटनेस इंजेक्शन का डोज दिए रेफर कर देते हैं।
रोजाना सड़क दुर्घटनाओं में घायल होकर करीब 40 से 60 युवक पहुंचते हैं। प्राथमिक उपचार के बाद घायल को 24 घंटे में टिटनेस इंजेक्शन का डोज जरूरी होता है पर अस्पतालों में टिटनेस का टिटबैक इंजेक्शन की आपूर्ति दो सालों से बंद है। जिला अस्पताल के चीफ फार्मासिस्ट डॉ. जितेंद्र कटियार ने बताया कि इसके लिए कई बार शासन को पत्र भेजा गया है। इसके बावजूद टिटनेस इंजेक्शन की आपूर्ति नहीं हुई है। बाहर से खरीद कर घायलों को डोज देना पड़ता है। जिलाधिकारी शुभ्रंन्त शुक्ल ने बताया कि टिटनेस इंजेक्शन न होना गंभीर है। वह जल्द शासन को पत्र लिखकर डिमांड करेंगे।
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लाइलाज बीमारी है टिटनेस
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. गीतम सिंह का कहना है कि टिटनेस बेहद खतरनाक वायरल है। शरीर में जख्म होने पर एहतियात के लिए टिटनेस का इंजेक्शन जरूरी होता है। शरीर में टिटनेस वायरस होने पर गले व सिर की मांसपेशियों में अकड़न आ जाती है। बेहतर उपचार न मिलने पर म।रीज की जान चली जाती है टिटनेस लाइलाज बीमारी है।