सातवीं मोहर्रम पर पैगंबर-ए-इस्लाम के नवासे हजरत इमाम हुसैन की याद में रविवार की दोपहर नगर में अलम का जुलूस निकाला गया। जुलूस मोहल्ला बिर्तिया के इमामबाड़ा से शुरू होकर लाहौरी टोली, ऊंचा, सैयदवाड़ा, रजा नगर, जेरकिला, अस्पताल रोड व मुख्य मार्ग से होकर पश्चिमी बाईपास पहुंचा। यहां मजार पर सलामी देकर लौटा।
इस मौके पर जामा मस्जिद के पेश इमाम जियाउल हक ने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत से सबक लें। यजीद की गलत हुकूमत को नहीं तस्लीम किया। इमाम हुसैन पानी के लिए मजबूर या लाचार नहीं थे बल्कि खुदमुख्तार थे। एक इशारे पर नहर ए फरात आपके कदम मुबारक चूमने को दौड़ पड़ता मगर खुद कुर्बान होकर इस्लाम को ता कयामत तक जिंदा रहने वाली जिंदगी देना चाहते थे जब इमाम ए जैनुल आबदीन ने गुस्से में अपनी छड़ी मुबारक जमीं पर मारी, उसी वक्त दरिया जारी हो गया जो आज तक रवा दवां है।
इमाम के बेटे की यह ताकत फिर खुद इमामे हुसैन की अजमत का क्या आलम होगा। सौरिख प्रतिनिधि के अनुसार यहां पर भी अलम का जुलूस निकाला गया जो राजापुर के इमामबाड़ा से बरामद हुआ। जुलूस से पहले मजलिस का एहतेमाम किया गया। मातमी दस्ते के साथ यह जुलूस बड़ा इमामबाड़ा ऊंचा सहित तमाम इमाम चौक पर हाजिरी देते हुए वापस हुआ। रात में मेंहदी का जुलूस नगरिया महादेव से उठ कर इमामबाड़ा आले हसन पर खत्म हुआ। इसके बाद मजलिस का एहतेमाम किया गया। सकरावा में अलम का जुलूस मोहल्ला बैसवाड़ा, मोहद्दीनगर, पठानन कुरैशियान से होते हुए निकाला गया।
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