छिबरामऊ। कृषि उत्पादन मंडी समिति में हुए तीन करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले के मामले में बुधवार को एक नया मोड़ आ गया है। मामले में निलंबित चल रहे तत्कालीन मंडी सचिव श्रवण परमार ने चुप्पी तोड़ते हुए खुद को निर्दाेष बताया है। उन्होंने सीधे तौर पर व्यापारियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि व्यापारियों द्वारा समय पर सरकारी बकाये का भुगतान न करना ही उनके लिए भारी पड़ गया।
निलंबित सचिव श्रवण परमार ने बताया कि छिबरामऊ, गुरसहायगंज और सौरिख के 45 व्यापारियों पर एक करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि बकाया है। उन्होंने कहा मैंने इस बकाए को वसूलने के लिए कई बार प्रयास किए और व्यापारियों से संपर्क किया लेकिन उन्होंने पैसा जमा नहीं किया। परमार ने घोटाले के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया कि व्यापारियों द्वारा कुछ पैसा आरटीजीएस के माध्यम से भी जमा कराया गया है। उनके पास जमा की गई पाई-पाई और बचे हुए बकाए का पूरा पुख्ता रिकॉर्ड मौजूद है। उन्होंने साफ कहा कि उनकी तरफ से कोई घोटाला नहीं किया गया है।
मामले में आठ जुलाई को मंडी परिषद कानपुर के उपनिदेशक प्रशासन एवं विपणन संजय कुमार सिंह, लेखा विभाग की साक्षी सिंह, लिपिक राजकुमार और शशि कुमार मिश्रा की टीम जांच के लिए पहुंची थी। जांच के बाद तत्कालीन सचिव श्रवण परमार और लिपिक ज्ञानेश कुमार को निलंबित कर दिया गया था। मंडी समिति में दर्ज हुई प्राथमिकी और जारी कानूनी कार्रवाई के संबंध में पूछने पर श्रवण परमार ने विभागीय अधिकारियों पर पूरा भरोसा जताया। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होने दीजिए, जांच में दूध का दूध और पानी का पानी साफ हो जाएगा और सच सबके सामने आ जाएगा। फिलहाल इस बयान के बाद मंडी प्रशासन और व्यापारियों के बीच खलबली मच गई है।
क्राइम इंस्पेक्टर ने शुरू की जांच
प्रभारी निरीक्षक कपिल दुबे ने बताया कि कृषि उत्पादन मंडी समिति में तीन करोड़ से अधिक घोटाले की जांच क्राइम इंस्पेक्टर दिनेश कुमार कर रहे हैं। प्रारंभिक जांच में शिकायतकर्ता से प्रपत्र मांगे गए हैं।