तिर्वा (कन्नौज)। छोटी-छोटी बातों पर बढ़ती तकरार, आपसी मनमुटाव और घरेलू विवाद कई बार हंसते-खेलते परिवारों को बिखरने की कगार पर पहुंचा देते हैं। रिश्तों में आई कड़वाहट जब थाने और अदालत तक पहुंचती है, तो उसका असर सिर्फ दंपती पर ही नहीं। बल्कि बच्चों और पूरे परिवार पर पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र में 110 पारिवारिक विवादों में 83 दंपती पुराने गिले शिकवे भुलकर साथ रहने पर सहमति जताई है।
शासन के निर्देश पर थानों में संचालित परिवार परामर्श केंद्रों का उद्देश्य घरेलू और वैवाहिक विवादों को आपसी बातचीत, समझदारी और सहमति के जरिए सुलझाना है। इसी क्रम में जनवरी से सितंबर तक पारिवारिक विवादों से जुड़े 110 मामले पुलिस के पास पहुंचे। इनमें अधिकांश मामले पति-पत्नी के बीच अनबन और घरेलू कलह से संबंधित थे।मिशन शक्ति प्रभारी निरीक्षक रणजीत सिंह के नेतृत्व में महिला आरक्षी मनोरमा, मयूरी, आकांक्षा और रश्मि तथा काउंसलर सुरेश चंद्र की टीम ने विवादों को गंभीरता से सुना। दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया और आपसी संवाद के जरिए गलत फहमियां दूर करने का प्रयास किया गया।
इसका परिणाम रहा कि 110 मामलों में से 83 दंपती एक बार फिर साथ रहने के लिए राजी हो गए। यह आंकड़ा उन परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है, जिनके रिश्ते विवादों के चलते टूटने की कगार पर पहुंच गए थे। हालांकि, सभी मामलों में आपसी सहमति नहीं बन सकी। पुलिस ने 18 मामलों में प्राथमिकी दर्ज की, जबकि चार शिकायतें विधिक प्रक्रिया में हैं और तीन मामलों में परामर्श की प्रक्रिया जारी है।
परिवार बचाना पुलिस की प्राथमिकता
कोतवाल संजय शुक्ल ने बताया कि पुलिस की पहली प्राथमिकता परिवारों को टूटने से बचाना है, जहां आपसी समझ और बातचीत से विवाद सुलझ सकता है, वहां दोनों पक्षों को समझाकर रिश्तों को एक और मौका देने का प्रयास किया जाता है। हालांकि, गंभीर मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई भी की जाती है।