आलू किसानों पर बारिश एक बार फिर कहर बनकर टूटी है। करीब चौबीस घंटे से लगातार हो रही बारिश से खेतों में खड़ी आलू की 25 फीसदी व सरसों, गेहूं सहित अन्य फसलों को भारी नुकसान हुआ है। वहीं शीतगृह स्वामियों ने कोल्ड स्टोरेज के गेट बंद कर लिए हैं। आलू भंडारण के लिए शीतगृहों के बाहर ट्रैक्टरों की लंबी कतारें रोजाना लग रही हैं, लेकिन रेगुलर किसानों का ही आलू भंडारित किया जा रहा है।
करीब एक पखवारे से आलू भंडारण के लिए मारा-मारी मची है। करीब तीन दिनों से शीतगृह स्वामियों ने किसानों का आलू लेना बंद कर दिया। बिना टोकन के कोई भी ट्रैक्टर अंदर नहीं पहुंच पा रहा है। केवल उन किसानों का शीतगृहों में आलू भंडारित हो रहा है, जो कि शीतगृहों में रेगुलर आलू भंडारित कर रहे हैं। वहीं शनिवार रात से शुरू हुई रिमझिम बारिश ने रविवार सुबह रफ्तार पकड़ ली।
इससे खेतों में खड़ा करीब 25 फीसदी आलू के सड़ने के संभावनाएं प्रबल हो गई हैं। जिला कृषि अधिकारी अभिनंदन सिंह यादव का कहना है कि यदि मौसम नहीं खुला तो आलू किसानों को भारी नुकसान होगा। हालांकि करीब 70 फीसदी किसानों ने आलू खोद लिया है। चिप्सोना सहित कुछ प्रजातियों के आलू पकने में ज्यादा समय लेते हैं, वह आलू खेतों में है। बारिश के साथ तेज हवाओं से गेहूं खेतों में गिर गया है। जायद की मक्का की बुआई कर चुके किसानों को फायदा होगा।
चटक धूप से आलू का होगा बुरा हाल
बारिश के बाद यदि मौसम दो से तीन दिन नहीं खुलता है तो किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगा। वहीं चटक धूप आलू किसानों के लिए काफी घातक सिद्ध होगी। धूप निकलने से आलू के सड़ने व आलू के फटने की गुंजाइश अधिक रहेगी।
करीब 70 फीसदी शीतगृह फुल
जिले में शीतगृहों की संख्या 101 पहुंच गई है। इसके बावजूद आलू भंडारित करने के लिए किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शीतगृह स्वामी आशीष कपूर ने कहा कि अनुमानित 70 फीसदी शीतगृह भर चुके हैं। आलू को चैंबरों में पहुंचाने का काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि बारिश के बाद खुलने वाला आलू भंडारित करने योग्य नहीं होगा। हालांकि भंडारित करने वाले किसानों से पहले सहमति पत्र लिया जाएगा, उसके बाद उसे भंडारित किया जाएगा।
किसानों का आलू किसी भी सूरत में बाहर नहीं रहने दिया जाएगा। फिलहाल उनके पास ऐसी कोई शिकायत किसानों ने दर्ज नहीं कराई कि उनका आलू भंडारित नहीं किया जा रहा है। ऐसा कोई मामला उनके संज्ञान में आता है तो प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। यदि आलू को बाहर निर्यात करने संबंधी कोई रणनीति बनी तो इस पर भी विचार किया जाएगा। बारिश के चलते तीनों तहसीलों के एसडीएम को निर्देश दिए गए हैं कि वह राजस्व विभाग की टीम को लगाकर नुकसान का आंकलन कराकर रिपोर्ट प्रेषित करें।
अनुज कुमार झा, डीएम