सीएम अखिलेश यादव और सांसद डिंपल यादव की ओर से जिले
में बहाई जा रही विकास की गंगा ने कई सपा नेताओं को चुनावी नैया पार लगा
दी। विकास कार्यों के बदले में जनता की खुशी वोट के रूप में मतपेटियों तक
पहुंची। यही वजह है कि एक ही वार्ड में सपा के कई नेताओं के आमने-सामने
लड़ने से वोट बैंक में बंटवारा भी हुआ।
इसके बावजूद सपा नेताओं ने जीत
हासिल करने में सफलता पाई। ज्ञात हो कि नेताओं की चुनाव लड़ने की अति
महत्वाकांक्षा के चक्कर में जिले में सपा ने अधिकृत तौर पर प्रत्याशियों की
घोषणा नहीं की। इस कारण विधायक समेत अन्य जनप्रतिनिधि भी खुलकर पार्टी
प्रत्याशियों के समर्थन में वोट मांगने नहीं उतरे।
पार्टी ने फ्रेंडली फाइट
के तहत सबको चुनाव लड़ने का मौका दिया। जनसंपर्क के दौरान भी नेताओं ने
सपा की ओर से कराए गए विकास कार्य गिनाए। वार्ड एक, दो, पांच, सात, आठ, 10,
11, 17, 18, 21, 25 व 26 में सपा नेताओं ने जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव
में जीत हासिल कर अपना वर्चस्व कायम किया है।
उधर, पंचायत चुनाव के
जरिए भाजपा ने ग्रामीण क्षेत्र में अपनी बढ़ती पहुंच को साबित कर दिया है।
इस बार भाजपा के छह जिला पंचायत सदस्य जीते हैं, जबकि पिछली बार उसका खाता
भी नहीं खुला था। इस बार वार्ड तीन, चार, 12, 22, 24 और 28 में भाजपा ने
जीत दर्ज की। पंचायत चुनाव के नतीजों में बसपा का ग्राफ तेजी से घटा है।
हालांकि, बसपा ने जिले भर में डीडीसी में अधिकृत प्रत्याशी घोषित किए। पूरा
संगठन गांव-गांव घूमे व प्रचार किए। फिर भी इस चुनाव में सबसे ज्यादा
करारा झटका बसपा को लगा है। बसपा के पिछली बार आधा दर्जन से जिला पंचायत
सदस्य थे। वहीं जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में 14 जिला पंचायत
सदस्यों ने बसपा के पक्ष में वोट देकर मुन्नी अंबेडकर को अध्यक्ष चुना था।
इस बार बसपा के वार्ड छह और 23 में ही दो प्रत्याशी जीत सके।