श्रीराम कथा महोत्सव का पंडाल रविवार की शाम उस समय आतिशबाजी की गड़गड़ाहट और ढोलक मंजीरों की थापों पर गूंज उठा जब रामजन्म की कथा का प्रसंग शुरू हुआ। भगवान राम और उनके तीनों भाइयों के स्वरूप में बच्चों को लेकर जब राजा दशरथ ने अपनी तीनों रानियों के साथ कथा पंडाल में प्रवेश किया वैसे ही कथा श्रवण कर रही महिलाओं और भक्तों ने उन पर पुष्प वर्षा की। लोग खुशी से झूम उठे। चारों तरफ बधाई गीत गुनगुनाए जाने लगे।
नगर के आरएस यादव इंटर कालेज में श्री गोविंद सत साहित्य प्रचार समिति और प्रभात फेरी मंडल द्वारा आयोजित श्रीरामकथा महोत्सव में श्रीराम जन्म कथा के प्रसंग का वर्णन किया गया। महिलाओं और भक्तों से खचाखच भरे कथा पंडाल में जैसे ही संगीत की मधुर धुनों पर ऋषिकेश से पधारे ब्रह्मचारी संत शिवबली चौबे जी महाराज ने राम जन्मोत्सव के प्रसंग का वर्णन किया। उसी दौरान राजसी ठाठबाट के साथ राजा दशरथ और उनकी तीनों रानियों ने नन्हे मुन्ने भगवान स्वरूप बाल रूपों को लेकर कथा पंडाल में प्रवेश किया।
उनके आगे ढोलक मंजीरा और ढपली के साथ नाचते कूदते बधाई गाते हुए कीर्तन मंडली चल रही थी। उन लोगों के पंडाल में आते ही महिलाओं और श्रोताओं ने भगवान राम और उनके तीनों भाइयों पर पुष्प वर्षा की। व्यास गद्दी से संगीतमयी धुन पर ...चलो रे सखी देख आए प्यारे रघुरइया और ...भए प्रगट कृपाला दीन दयाला भजन पर पांडाल में बैठे लोग झूम उठे। राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के स्वरूप में बाल गोपालों को पालने में झुलाया गया। यह दृश्य देख लोग भावविभोर हो उठे।
उन्होंने राम जन्मोत्सव कथा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा सच्चे मन से भगवान को स्वीकार लो भगवान कभी नहीं भूलते। भगवान किसी समय साधन और सामग्री के आधीन नहीं वह सिर्फ भाव के भूखे हैं।
...हे नाथ, हे मेरे नाथ, मैं आपको भूलूं नहीं इस मूल मंत्र को अपना लो और मैं केवल भगवान को हूं और भगवान केवल मेरे हैं यह सच्चे मन से स्वीकार कर लो समझ लो बेड़ा पार है। सुबह प्रार्थना बेला में ऋषिकेश के स्वामी सदाशिव नित्यानंद गिरि जी ने प्रवचन किए। आयोजकों ने बताया 26 सितंबर को श्रीराम विवाह की कथा का वर्णन किया जाएगा और सुबह 9 बजे सौरिख रोड स्थित कालिकादेवी मंदिर से धूमधाम के साथ रामबारात निकाली जाएगी।