कन्नौज। शासन स्तर से अंतरजनपदीय तबादला का आदेश के बाद अपने-अपने पसंद के जिलों में जाने के लिए आवेदन करने वाले कई शिक्षकों को झटका लगा है। सत्यापन के दौरान मानक से अलग होने पर उनके आवेदन फेल हो गए हैं। इसमें अलग-अलग वजह बताकर तबादला चाहने वालों का तर्क भी मानक के मुताबिक नहीं मिला। न तो बीमारी का बहाना काम आया न ही पति या पत्नी का सरकारी नौकरी में होने की बात मानक में खरी उतरी।
अंतरजनपदीय तबादला के तहत जिले से 269 शिक्षकों ने आवेदन किया है। उनमें से 101 शिक्षकों को बिना भारांक होने की वजह कर उनका सत्यापन नहीं किया गया। इसमें 40 शिक्षकों का तबादला हो चुका है जबकि41 लोगों का तबादला कोर्ट के आदेश पर रोका जा चुका है। बचे हुए 20 शिक्षकों के आवेदन की जांच की जा रही है। इसके अलावा भारांक श्रेणी में 70 आवेदन बचे हैं। शुक्रवार को उन सभी के आवेदन की विकास भवन सभागार में पड़ताल की गई। उसमें से 13 ऐसे आवेदन थे, जिसमें अपनी बीमारी या परिजनों के आसाध्य रोग से पीड़ित होने की बात कही गई थी। जांच के दौरान मेडिकल टीम ने उन 13 में से सिर्फ तीन ही आवेदन को सही पाया, बाकी 10 को निरस्त कर दिया। इसके अलावा 16 ऐसे आवेदन थे, जिसमें महिला शिक्षक के पति दूसरे विभागों में तैनात रहे। सत्यापन के दौरान उन 16 में से 12 आवेदन निरस्त हो गए। चार को ही पात्र माना गया। इसके 41 ऐसे आवेदन थे, जिसमें पति और पत्नी दोनों ही बेसिक शिक्षा विभाग में हैं, लेकिन तैनाती अलग-अलग जनपदों में है। ऐसे सभी आवेदन मंजूर कर लिए गए हैं।
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इस टीम ने जांचे दस्तावेज
विकास भवन के सभागार में दस्तावेजों की जांच प्रशासन की ओर से गठित टीम की मौजूदगी में हुआ। जिसमें अध्यक्ष के रूप में सीडीओ आरएन सिंह मौजूद रहे। सचिव के रूप में बीएसए कौस्तुभ सिंह, डीएम से नामित डिप्टी कलक्टर उमाकांत तिवारी, स्वास्थ्य विभाग से जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. शक्ति बसु और एसीएमओ डॉ. डीपी आर्या रहे।
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बीएसए बोले, जांच रिपोर्ट के आधार ही तबादला
इस मामले में बीएसए कौस्तुभ सिंह ने बताया कि शासन के निर्देश के तहत ही तबादला चाहने वाले आवेदनों की पड़ताल कराई गई है। जो आवेदन तबादला मानक पर खरे उतरे हैं, उन्हें जल्द ही यहां से रिलीव कर दिया जाएगा। जो आवेदन किसी वजह कर निरस्त किए गए हैं, उन्हें यहां से तबादला नहीं किया जाएगा। शुक्रवार को हुए सत्यापन की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी, उसी के बाद आगे की कार्रवाई होगी।