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रावण के किरदार में जान फूंक देते हैं दीक्षित

Tue, 20 Oct 2015 11:38 PM IST
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
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रामसच्चे दीक्षित ने रावण के किरदार में लगभग 50 साल पूरे कर लिए हैं। उन्हें अपने खानदान से ही इस किरदार के उत्तराधिकार की तलाश है। उन्हें यह जिम्मेदारी अपने बाबा से विरासत में मिली थी। 76 साल की उम्र पूरी कर चुके दीक्षित जब रावण के किरदार में मैदान में उतरते हैं तो उनकी चुस्ती फुर्ती और स्फूर्ति देखकर लोग दंग रह जाते हैं।
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वह आज भी रावण के किरदार में जान फूंक देते हैं। दीक्षितान में रहने वाले रामसच्चे जमींदार परिवार से हैं। वह रावण के किरदार को जीवंत करने के लिए मशहूर हैं। अब वह उम्र के 76वें पड़ाव पर आ चुके हैं। इस किरदार का निर्वाह वह 22 साल की उम्र से करते आ रहे हैं। वह चाहते हैं कि परंपरा को खानदान का कोई चिराग आगे ले जाए।

इस मंशा से वह खोज में लगे हुए भी हैं। रामलीला के इस महत्वपूर्ण किरदार को पहले उनके बाबा रामस्वरूप दीक्षित करते थे। उनकी ख्याति यह थी कि रावण का चरित्र उनके नाम से ज्यादा प्रभावी हो गया यही उनकी पहचान बन गई। उनकी संवाद अदायगी, अभिनय, युद्ध कौशल, भाव भंगिमाएं, चपलता और शारीरिक प्रभाव के दर्शक मुरीद थे।
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50 साल तक वह लोहा मनवाते रहे। उन दिनों रामसच्चे दीक्षित मेघनाथ का चरित्र करते थे। बाबा की शारीरिक कमजोरी और खुद के युवा तेवरों से रावण का चरित्र उनके हिस्से में आ गया। तब से वह यह विरासत संभाले हैं। इतने सालों में कोई भी आयोजन ऐसा नहीं किया जब वह मौजूद न रहे हों। सोमवार को अमर उजाला ने उनसे खास मुलाकात की।

उन्होंने कहा कि रावण ज्ञानी था। अपने व परिवार के मोक्ष के लिए उसने राम से बैर लिया। वह कहते हैं कि कोई भी किरदार निभाया जाए उसकी आत्मा अभिनय करने वाले को छूती जरूर है। राम की सेना से टकराव के दौरान अतिरिक्त ऊर्जा आ ही जाती है।
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