छिबरामऊ(कन्नौज)। छिबरामऊ से ऐरवाकटरा तक बन रही फोर लेन सड़क का निर्माण कार्य तेजी पकड़ रहा है। कार्यदायी संस्था आरसीएल ने एक रूट पर आने वाले धार्मिक स्थलों की सूची बनाकर लोक निर्माण विभाग को सौंपी है। वहीं लोक निर्माण विभाग के अफसरों ने बताया कि सरकारी जगह में आने वाले धार्मिक स्थलों को शिफ्ट कराया जाएगा।
सपा शासनकाल में वर्ष 2016 में छिबरामऊ से ऐरवाकटरा तक फोरलेन सड़क बनाने के लिए 266 करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया था। 30.5 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण शुरू करा दिया गया। कार्यदायी संस्था आरसीएल ने सड़क निर्माण का 60 फीसदी कार्य पूरा करा लिया है। शेष कार्य बिजली के पोल शिफ्टिंग, धार्मिक स्थलों, पुलों के कारण अटका है।
आरसीएल कंपनी के अवर अभियंता इंजीनियर राजन यादव ने बताया कि 30.5 किलोमीटर की जद में भाउलपुर, खड़िनी, सौरिख, राजापुर, जरारा, जाफराबाद, छिबरामऊ में कई धार्मिक स्थल आ रहे हैं। कंपनी ने इसकी रिपोर्ट तैयार कर लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को सौंप दी है। लोक निर्माण विभाग से जो निर्णय लिया जाएगा, उसी आधार पर काम आगे बढ़ाया जाएगा।
30.5 किलोमीटर की दूरी में बन रहे तीन पुल
कन्नौज जनपद के छिबरामऊ से औरैया जनपद के ऐरवाकटरा तक बनने वाली 30.5 किलोमीटर सड़क में तीन पुल बनाए जा रहे हैं। पहला पुल सौरिख रोड पर जाफराबाद, दूसरा खड़िनी व तीसरा ऐरवाकटरा में बन रहा है। 27 किलोमीटर लंबी सड़क कन्नौज जनपद की सीमा में है। 3.5 किलोमीटर सड़क औरैया जनपद की सीमा में बन रही है। फोरलेन सड़क का निर्माण कार्य जून 2020 तक पूरा होना है।
धार्मिक स्थलों को कराया जाएगा शिफ्ट
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता विमल कुमार ने बताया कि सड़क निर्माण की जद में आने वाले धार्मिक स्थलों को पीछे जगह मिलने पर शिफ्ट किया जाएगा। जहां जगह नहीं है, वहां लोगों के साथ विचार-विमर्श कर दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। जन आस्था के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाएगा।
कालिका देवी मंदिर से जुड़ी हैं लोगों की आस्थाएं
सौरिख रोड स्थित सिद्धपीठ मां कालिका देवी मंदिर से क्षेत्रीय लोगों की धार्मिक आस्थाएं जुड़ी हैं। मंदिर के सर्वराकार पंडित देवेंद्र चतुर्वेदी बताते हैं कि लगभग चार सौ साल पहले मंदिर की स्थापना हुई थी। पौराणिक मान्यता है कि इस मंदिर में आल्हा ऊदल के पुरोहित ढेबा ने उनकी जीत के लिए आराधना की थी। उन्होंने बताया कि मंदिर की एक ईंट भी हटाई गई तो आंदोलन किया जाएगा। वहीं इसी रोड पर स्थित काली देवी मंदिर से भी लोगों की आस्थाएं जुड़ी हैं। साल 1989 में नगर की कन्या कमला देवी यहां आराधना के लिए बैठी थीं। 2001 में इसी स्थान पर समाधि ली थी। उनके अनुयायिओं ने मंदिर का निर्माण कराया है।