एक लाख रुपये से कम व्यय करने वाली ग्राम पंचायतों के प्रधान, सचिव, तकनीकी सहायक एवं रोजगार सेवकों को नोटिस भेजने के निर्देश बीडीओ ने दिए हैं। वहीं काम न करने वाले रोजगार सेवकों को बाहर का रास्ता दिखाने की बात कही गई है। सभी ग्राम पंचायतों में वर्ष 2014-15 में कराए गए विकास कार्यों की जांच की जाएगी।
तालग्राम खंड विकास अधिकारी पंकज यादव ने बैठक में तकनीकी सहायकों व रोजगार सेवकों की जमकर क्लास ली। उन्होंने पूछा कि मनरेगा कार्य आखिर क्यों तेजी से नहीं हो रहे हैं। तकनीकी सहायकों ने कहा कि प्रधान सहयोग नहीं करते हैं। लेखपाल पैमाइश करने से कतराते हैं।
अक्सर ग्रामीण विवाद भी खड़ा कर देते हैं, जिस कारण काम तेजी से कराने में बाधा उत्पन्न होती है। शहर की नजदीक ग्राम पंचायतों के मजदूरी करने शहर चले जाते हैं। शिकायत की गई कि एफटीओ के जरिए मजदूरों के खाते में पैसा पहुंचने में विलंब हो रहा है। वहीं रोजगार सेवक भी काम में रुचि नहीं ले रहे हैं।
इस पर बीडीओ ने कहा कि रोजगार सेवक यदि काम नहीं कर रहे हैं तो ग्राम पंचायत से प्रस्ताव तैयार कराकर उसे हटाएं। तकनीकी सहायकों का काम दूसरे कार्यों पर रहता है। मरनेगा में एक फीसदी भी रुचि नहीं ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि डीएम ने आदेश दिया है कि सभी ग्राम पंचायतों में बीते वित्तीय वर्ष में राज्य वित्त व तेरहवें वित्त से प्राप्त धनराशि से कराए गए विकास कार्यों की गहनता से जांच कराई जाए।
जांच करने के लिए जिला विकास अधिकारी अध्यक्ष, लेखाकार महेश कुशवाहा व कृष्णलाल चौहान इस टीम के सदस्य होंगे। बैठक में एडीओ आईएसबी सेवाराम वर्मा, जेई आरईएस योगेंद्र सिंह, सचिव रमेश चंद्र, मुजीब खां, गौरीशंकर, दिनेश गिहार, सुरेश सैनी आदि मौजूद रहे।