तालग्राम। माह-ए-रमजान में इबादत का माहौल है। समाज के उन जरूरतमंद परिवारों की चिंता भी जरूरी है, जिनके घरों में इफ्तार के वक्त चूल्हा तक मुश्किल से जल पाता है। हाजी इरशाद अली ने बताया कि रमजान का मकसद सिर्फ रोजा रखना नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ना व इंसानियत को जिंदा रखना है। हाजी का कहना है रमजान का असली पैगाम भूख व प्यास का एहसास कर इंसान को हमदर्द बनाना है। उन्होंने कहा कि नेमतों की कद्र उसी वक्त पूरी होती है, जब हम अपने दस्तरखान से कुछ हिस्सा निकालकर गरीबों व बेसहारा लोगों तक पहुंचाएं। रमजान हमें सिखाता है कि असली खुशी बांटने में है, दिखावे में नहीं।