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शस्त्रागार 2012 से गायब हैं राइफल और कारतूस

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कन्नौज। कोतवाली के शस्त्रागार से 2012 में राइफल और 309 कारतूस होने की बात सामने आई है। इस दौरान कई बार पुलिस अधिकारियों का वार्षिक निरीक्षण हुआ लेकिन एक बार भी कोई गड़बड़ी पकड़ नहीं पाया।
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पुलिस की जांच में सामने आया है कि 2012 से थ्री नॉट थ्री राइफल और 309 कारतूसों का मिलान नहीं हो रहा था। हर बार कागजी कार्रवाई पूर्ण कर हेड मोहर्रिर अधिकारियों को सब कुछ ठीक दिखाते रहे। 2012 से कुछ समय पहले तक कोतवाली में जितेंद्र सिंह चंदेल, रामसुमेर और अशोक नागर हेड मोहर्रिर के पद पर रहे हैं। बीते दिनों अशोक नागर की मौत हो गई थी।
जितेंद्र सिंह चंदेल और रामसुमेर अन्य जनपदों में तैनात हैं। दोनों को नोटिस भेजकर बुलाया गया है। सीओ श्रीकांत प्रजापति ने बताया कि मामला काफी पुराना है। जल्द ही अधिकारियों के निर्देश पर कार्रवाई की जाएगी।
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कन्नौज। प्रथम विश्व युद्ध में थ्री नॉट थ्री नॉट राइफलों का इंग्लैंड और जर्मनी के सैनिकों ने इनका प्रयोग किया था। अंग्रेजी शासनकाल में 1945 में थ्री नॉट थ्री राइफल यूपी पुलिस को दी गई थी। इसकी मारक क्षमता दो किलोमीटर तक है। इससे पहले पुलिस के मस्कट 410 बंदूक हुआ करती है। 80 के दशक में सिपाहियों को इंसास, एके-47 दे गई है, जबकि 2019 में अब यूपी पुलिस के सिपाहियों के पाय जर्मनी की एमपी-5 राइफल दी गई है। यह राइफल काफी आधुनिक है।
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