क्षेत्र के गांव सैयदपुर सकरी में हजरत अलादाद बाबा रहतुल्लाह अलैह का उर्स धूमधाम से मनाया गया। बुधवार देरशाम जवाबी कव्वाली का प्रोग्राम हुआ। मुकाबला सुनने को पूरी रात लोगों की भीड़ जुटी रही। सुबह कुल शरीफ के बाद दो दिवसीय सालाना उर्स का समापन हो गया।
अजमेर से आए कव्वाल लतीफ अजमेरी ने ‘जर्रे को चट्टान बना दे या अल्लाह, हिंदू-मुस्लिम एक थाली में खाएं, ऐसा मेरा देश बना दे...या अल्लाह’ सुनाकर लोगों की वाहवाही लूटी। नात शरीफ ‘कौन टाल सकता है फैसला मोहम्मद का, फैसला खुदा का है फैसला मोहम्मद का’ को काफी पसंद किया गया।
मन्कबत ‘मेरा दिल भी तेरा तलबगार हो जाए, ख्वाजा तेरे दर का दीदार हो जाए’ को सुनाकर लोग झूमने पर मजबूर कर दिया। बनारस से आई कव्वाला नसीम परवीन ने मन्कबत ‘मुझ पर निगाह लुत्फ करम कीजिए ख्वाजा’ पेश की। इसके अलावा ‘तुम को जाना है जन्नत में अगर, अपने मां-बाप को अपने से जुदा न करना’ से खूब तारीफ हासिल की।
इसके बाद गजलों का दौर शुरू हुआ। लतीफ अजमेरी ने ‘हम तो दीवाने हैं ताजा हवा लेते हैं, खिड़कियां खोल के मौसम का मजा लेते हैं’ सुनाकर युवाओं को काफी प्रभावित किया। गजल ‘तुम्हारे पास मै आना चाहता हूं, गले तुमको लगाना चाहता हूं, तेरा दामन कहीं मिल जाए मुझको, मैं आंखों से लगाना चाहता हूं’ को भी पसंद किया गया।
नसीम परवीन की ‘दुनिया में जिंदगी का नजारा अजीब है, कोई यहां अमीर है तो कोई गरीब है’ और दूसरी गजल ‘अपनी तालीम है दुश्मन की भी इज्जत करना, वो जहां भी हो खुदा उसकी हिफाजत करना’ सुनकर युवाओं ने नोटों की बौछार कर दी। इस मौके पर सपा जिलाध्यक्ष मुन्ना दरोगा, कैश खां, शैलू कटियार, आरएस कठेरिया के अलावा नूरानी उर्स कमेटी के सरवर अली, शाह हुसैन, हसीब अली, असलम अली मौजूद रहे।