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यूपी में फसलों का उत्पादन अच्छा, लेकिन निर्यात दूसरे प्रदेशों से होता

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फोटो:17- जीटी रोड किनारे स्थित एक होटल में मौजूद लोग। संवाद - फोटो : KANNAUJ
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कन्नौज। कृषि उत्पादन आयुक्त मनोज सिंह ने कहा है कि प्रदेश में कई फसलों का उत्पादन सबसे अधिक होता है, लेकिन फसलों का निर्यात दूसरे प्रदेशों से किया जाता है। वैज्ञानिक व डॉक्टर मिलकर किसानों को नई तकनीकी से फसल के तरीके बताएं। ताकि किसान अच्छे मुनाफे पर जोर दें। वह शनिवार को एक दिवसीय आलू क्रेता-विक्रेता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
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शहर के एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि फसल की अधिक पैदावार करने से कोई फायदा नहीं है। हमारा लक्ष्य फसल को अधिक कीमत पर बिक्री करना और आमदनी में बढ़ोतरी है। यूपी में आलू और गेहूं की फसल काफी होने के बाद भी निर्यात गुजरात से होता है। ज्वार उत्पादन में भी प्रदेश अच्छा है पर बीज में पंजाब अच्छा होता है। उन्होंने कहा कि हापुड़ और कुशीनगर में सरकार नई-नई वैज्ञानिक विधि से किसानों को अच्छी उपज के लिए बीज उपलब्ध करा रहीं हैं।
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पेरू में पहले जन्मा है आलू
कृषि उत्पादन आयुक्त ने बताया कि आलू का जन्म पेरू में हुआ है। 3000 तरह के आलू की फसल वहां होती है। आलू पर निर्भरता ज्यादा होने पर सन 1843 में आयरलैंड में दो-तीन साल लगातार आलू की फसल नष्ट होने की वजह से बहुत बड़ी त्रासदी हुई थी। उन्होंने कहा कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य है कि आलू की नई टेक्नोलॉजी किसानों के खेत में हो और निर्यात की व्यवस्था बेहतर हो सके। आलू का निर्यात यूरोप आदि देशों में करें तो किसानों को आलू के सही दाम मिल सकें। फसल में ड्रिप स्प्रिंकलर का प्रयोग कर पानी की बचत होगी।
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आगरा के बाद कन्नौज में आलू का उत्पादन अधिक
डीएम शुभ्रांत शुक्ल ने कहा कि आगरा के बाद कन्नौज जनपद में आलू का उत्पादन सबसे अधिक होता है। 52 हजार हेक्टेयर में चिप्सोना, पुखराज, ख्याति, बहार, कुफरी, सिन्दूरी, कंचन, श्रीनाथ आदि आलू की फसलें होती हैं। इसमें 35 प्रतिशत कुफरी व चिप्सोना प्रजाति का आलू होता है। 12.60 लाख मीट्रिक टन आलू का उत्पादन होता है। जिले से लाल आलू का निर्यात बिहार, असम व नेपाल में किया जाता है। इस मौके पर उद्यान निदेशक आरके तोमर व केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान क्षेत्रीय केंद्र मोदीपुरम मेरठ के संयुक्त निदेशक डॉ. मनोज कुमार आदि लोग मौजूद रहे।
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निर्यात योग्य नहीं है आलू
संयुक्त निदेशक आलू अनुसंधान संस्थान लखनऊ डॉ. मनोज सिंह ने बताया कि कन्नौज में होने वाले आलू की गुणवत्ता निर्यात योग्य बेहतर नहीं है, इसलिए किस्मों में सुधार किया जाए। ड्रोन के जरिए कीटनाशक का छिड़काव होना चाहिए। आलू की किस्में कई तरह की होनी चाहिए। आलू ज्यादा बड़ा या छोटा नहीं होना चाहिए।
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