आलू की मंदी से त्रस्त किसानों को शीतगृहों में आलू
भंडारण में भी पसीना छूट रहा है। हालांकि पांच शीतगृह और चालू हो जाने से
शीतगृहों की संख्या 101 हो गई है। बावजूद इसके भंडारण में मारामारी हो रही
है।
जनपद के शीतगृह 50 से 60 फीसदी तक फुल हो चुके हैं। बड़ी
संख्या में लोग ट्रैक्टर ट्रालियों में आलू लादकर शीतगृहों के बाहर खड़े
हैं, अभी 25 से 30 फीसदी आलू की खुदाई बाकी है।
दूसरे देशों में
आलू निर्यात की जल्द योजना नहीं बनाई गई तो आलू किसान तबाह हो जाएंगे। मंडी
में आलू की अधिक आवक होने से भाव और गिरते जा रहे हैं।
उद्यान
विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में पिछले वर्ष 97 शीतगृहों में आलू
भंडारित हुआ था। इस बार शीतगृहों की संख्या 101 हो गई है। वर्ष 2013-14
में 47500 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की बुवाई हुई थी। इस बार करीब 1500
हेक्टयर का रकबा बढ़ गया है।
उत्पादन 1068750 से बढ़कर 1334257
होने की उम्मीद है। इस बार मौसम ने कई बार करवट ली। नतीजतन आलू की कच्ची
फसल प्रभावित हुई। इस बार बारिश होने के कारण किसान कच्ची फसल की खुदाई
नहीं कर पाए। नतीजतन पक्की का एरिया बढ़ गया, जो किसानों पर भारी पड़ रहा
है।
जिला उद्यान अधिकारी मुन्ना यादव ने बताया कि आलू की फसल को इस
बार कई झटके झेलने पड़े हैं। आलू की कच्ची फसल को बारिश का झटका लगा।
झुलसा और पाले का भी प्रकोप रहा, लेकिन तमाम दिक्कतों के बावजूद उत्पादन
बढ़ा है।
जिला उद्यान अधिकारी का कहना है कि अधिक उत्पादन से
व्यापारी भी अच्छी क्वालिटी का आलू खरीदेंगे। ऐसी स्थित में किसान आलू की
छंटाई कर भंडारित करें, ताकि बाद में अच्छी कीमत पर बिक्री किया जा सके।
कन्नौज।
इस बार बड़ी संख्या में किसानों ने बाहर से प्लांटर मशीन मंगा ली है। इससे
आलू की खुदाई जल्दी हो जाती है और मजदूरी में भी बचत होती है। जल्द खुदाई
से मंडियों में आलू की आवक अधिक हो गई है।
आलम यह है कि कई-कई
दिनों तक ट्रकों में आलू लदा खड़ा रहता है और किसान का नंबर ही नहीं आ
पाता। इससे मंडियों में तेजी से आलू के भाव गिर रहे हैं। मौजूदा समय में
सफेद आलू 220 रुपये पैकेट, लाल आलू 270 व चिप सोना 280 रुपये में बिक रहा
है।