कन्नौज। जिले के अंदर किसानों का मोह आलू फसल के लिए बढ़ता ही जा रहा है। सात सालों में 50 हजार बीघे (चार हजार हेक्टेयर) क्षेत्रफल बढ़ गया है। हालांकि बीच-बीच में रकबा बढ़ने और घटने का भी क्रम चला है। वर्ष 2015-16 में 48,500 हेक्टेयर क्षेत्रफल था, जो इस बार 52 हजार पार कर गया है।
आलू बेल्ट के नाम से मशहूर कन्नौज जनपद में करीब 52,500 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की फसल होती है। इस रकबे में पैदावार भी करीब 14,25000 मीट्रिक टन होने का अनुमान है। हालांकि कभी-कभी तो किसानों को आलू में लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है। फसल अधिक होने व गैर प्रांतों में आपूर्ति न हो पाने की वजह से आलू का रेट कम मिलता है। इस बार बारिश की वजह से अगेती आलू की फसल कई बार खराब हुई, जिस वजह से बीज की मांग किसानों ने हर बार की। दूसरी ओर नई फसल देरी से होने के कारण पुराने आलू का रेट किसानों को ठीक मिला। हालांकि जिले में गेहूं व मक्का की फसल भी काफी होती है। यह तीन फसलें अधिक होती हैं।
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कुछ इस तरह बढ़ गया क्षेत्रफल
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वर्ष रकबा हेक्टेयर उत्पादन मीट्रिक टन
2015-16 48,500 13,33,750
2016-17 48,600 12,69,200
2017-18 47,950 13,06,538
2018-19 45,900 11,47,500
2019-20 48,000 10,35,300
2020-21 50,250 12,06,000
2021-22 52,500 14,25,000
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जिले में करीब 52 हजार हेक्टेयर रकबे में आलू फसल होने का अनुमान है। किसानों को जब रेट अधिक मिलता है तो वह अधिक क्षेत्रफल में आलू करता है। जब दाम सही नहीं मिलते हैं तो आलू का रकबा घट जाता है।
सीपी अवस्थी, डीएचओ