कन्नौज। लोकसभा चुनाव में इस बार यहां पहले के मुकाबले सियासी घमासान ज्यादा होने के आसार हैं। खुद सपा मुखिया अखिलेश यादव 15 साल बाद अपने गढ़ को वापस हासिल करने के लिए मैदान में हैं। जबकि उनके मुकाबले भाजपा के सुब्रत पाठक अपनी सियासी जमीन को बचाए रखने के लिए डटे हैं। दोनों के बीच पहली जीत हासिल करने के लिए बसपा ने इमरान बिन जफर मैदान में हैं।
वर्ष 2022 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद ही इत्रनगरी से अखिलेश यादव के चुनाव में लड़ने की अटकलें लगने लगी थीं। उन्होंने कई बार इसका यहां इशारा भी दिया था। चुनाव के ऐलान के बाद वह यहां से अपने लगाव की दुहाई देते रहे। लेकिन नामांकन के दौरान उन्होंने अपनी जगह तेज प्रताप यादव को उम्मीदवार बना दिया। इससे कार्यकर्ता बिदक गए। जिले भर में दबी जुबान में ही सही विरोध होने लगा।
संगठन से मिले फीडबैक के बाद आखिरकार अखिलेश यादव को अपना फैसला बदलकर खुद को ही मैदान में उतारना पड़ा। नामांकन के बाद अब उन्हें चुनाव चिह्न भी आवंटित हो गया है।
दूसरी तरफ उनके सामने सपा के इस गढ़ पर कब्जा करने वाले भाजपा के सांसद सुब्रत पाठक फिर से मैदान में डटे हैं। वह लगातार चौथी बार चुनाव मैदान में हैं। शुरू के दो चुनाव में उन्हें कामयाबी नहीं मिली थी। हालांकि अपनी तीसरी कोशिश में वर्ष 2019 में हुए चुनाव को वह जीत गए थे। उनकी जीत ने सपा का रिकॉर्ड सात जीत के सफर को थाम दिया था।
इस बार फिर से सुब्रत पाठक पर ही भरोसा जताकर पार्टी ने उन्हें मैदान में उतारा है। देखने वाली बात होगी कि इस बार उनकी कोशिश कितनी रंग लाती है। इन दोनों के अलावा बसपा से यहां इमरान बिन जफर मैदान में हैं। कानपुर निवासी इमरान बिन जफर वर्ष 2014 में डिंपल यादव के मुकाबले आम आदमी पार्टी से चुनाव लड़ चुके हैं। इस बार वह बसपा के टिकट से मैदान में हैं।
इनसेट
फोटो: 24: अखिलेश यादव
कन्नौज से हैट्रिक लगा चुके अखिलेश
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने सियासी कॅरियर का आगाज कन्नौज से ही किया था। वर्ष 2000 के उपचुनाव में पहली बार ही उतर कर कामयाब होने वाले अखिलेश यादव ने उसके बाद वर्ष 2004 और वर्ष 2009 के चुनाव में लगातार तीन जीत हासिल की। इस सीट पर पहली और इकलौती हैट्रिक का रिकॉर्ड उनके नाम है। इसके अलावा वह वर्ष 2019 में आजगढ़ से सांसद रह चुके हैं। वर्ष 2022 में वह मैनपुरी के करहल से विधायक चुने गए थे। इन दिनों वह विधायक हैं।
फोटो: 25: सुब्रत पाठक
सपा का गढ़ ढहा चुके सुब्रत
अपने गठन के बाद से ही सपा का कन्नौज में वर्चस्व रहा है। 1998 से लेकर 2014 के बीच सपा ने यहां लगातार सात जीत हासिल की है। ऐसे में सपा के किले में सेंधमारी करते हुए सुब्रत पाठक ने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में ढहा दिया। उसके बाद वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यहां की तीनों विधानसभा सीट पर भी कब्जा जमा लिया।
फोटो: 26 : इमरान बिन जफर
बसपा को इमरान के सहारे पहली जीत की तलाश
सूबे में अपनी हुकूमत के दौरान बसपा ने वर्ष 1997 में कन्नौज को जिले का दर्जा दिया था। फर्रुखाबाद जिले का हिस्सा रहे कन्नौज को जिला बनाने वाली बसपा को यहां कभी सियासी कामयाबी नहीं मिल सकी है। यहां विधानसभा चुनाव में सिर्फ एक बार तिर्वा से 2007 में जीत हासिल करने वाली बसपा को संसदीय चुनाव में एक अदद पहली जीत की तलाश है। वर्ष 2014 में भाजपा के उभार से पहले बसपा ही यहां सपा को कड़ी टक्कर देते हुए दूसरे नंबर तक पहुंचती रही है। वर्ष 2014 में तीसरे नंबर पर रही बसपा ने 2019 के चुनाव में सपा संग हुए गठबंधन के तहत यहां से चुनाव नहीं लड़ा था। इस बार उसने यहां से कानपुर निवासी इमरान बिन जफर को मैदान में उतारा है।