कन्नौज। पहले छोटे भाई के कागजात लगाकर फौज में नौकरी पाना और फिर हत्या कर छोटे भाई को ही जेल पहुंचाने वाले शातिर फौजी को बचाने में पुलिस ने हर हथकंडा अपनाया। न सिर्फ जांच में खेल किया गया बल्कि कुर्की की कार्रवाई को भी मजाक बना दिया। चार्जशीट कोर्ट में दाखिल करने के बाद भी पीड़ित पक्ष को जांच चलने का झांसा दिया जाता रहा। पीड़ित ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो मामला खुलकर सामने आ गया। इसे सुनकर सभी की आंखें फटी रह गईं।
विशुनगढ़ थाने के गांव रुद्रपुर निवासी शातिर अंकित ने अपने भाई आदित्य के शैक्षिक दस्तावेजों के आधार पर जुलाई 2017 में फौज में सिपाही के पद पर नौकरी हासिल कर ली। वर्तमान में कुमाऊं रेजिमेंट में पश्चिम बंगाल में तैनात था। 22 जुलाई 2019 को छुट्टी पर घर आने के बाद पड़ोसी जयवीर की गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने अंकित, अनुराग, रामदास, आशीष और राजा उर्फ शिवम के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को जेल भेज दिया था। अंकित अपनी शातिर चाल के कारण बच गया। वह आदित्य के नाम से फौज में नौकरी कर रहा था। इससे बचता रहा। इधर, पुलिस ने भी जेब गर्म की और अंकित को फरार साबित कर कुर्की की खानापूरी कर डाली। सूत्रों के मुताबिक तत्कालीन थाना प्रभारी और चौकी प्रभारी ने खेल किया। कुर्की के नाम पर सिर्फ रस्म अदायगी की गई।
इधर, अंकित की गिरफ्तारी न होने पर मृतक के बेटे अनूप कुमार ने हाईकोर्ट में अपील की तो पुलिस अधिकारियों के इशारे पर आदित्य ने खुद को अंकित बताकर दो जनवरी 2019 को सीजेएम कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। इसके बाद बेटे अनूप कुमार ने थाना प्रभारी और चौकी प्रभारी से आदित्य को पिता का हत्यारोपी न बताते हुए अंकित के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस अधिकारियों ने उसे फटकार कर भगा दिया। इसके बाद उसने फिर हाईकोर्ट की शरण ली। अंकित के गोली मारकर हत्या की जानकारी के बाद भी पुलिस मुख्य आरोपी को बचाती रही। हाईकोर्ट की फटकार के बाद पुलिस ने अंकित को गिरफ्तारी कर जेल भेज दिया।
तत्कालीन थाना प्रभारी इंदरगढ़ थाने के चार्ज पर
पूरे मामले के दौरान सुजीत कुमार वर्मा चार्ज पर थे। मौजूदा समय में वह इंदरगढ़ थाने के चार्ज पर हैं। एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह ने एएसपी विनोद कुमार को मामले की जांच सौंपी है। एएसपी ने थाना प्रभारी सुजीत कुमार वर्मा और तत्कालीन शंकरपुर चौकी प्रभारी सतेंद्र सिंह के बयान दर्ज किए हैं। एएसपी ने बताया कि मामले की जांच चल रही है। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ये उठते हैं सवाल
- बिना पुलिस की मिलीभगत के आखिर आदित्य ने अंकित बनकर कोर्ट में कैसे सरेंडर कर दिया। अगर सरेंडर के वक्त पुलिस को जानकारी नहीं हुई तो बाद में उसने आपत्ति क्यों नहीं दर्ज कराई। यानी कोर्ट को सही जानकारी उपलब्ध क्यों नहीं कराई गई। कोर्ट को भी धोखे में रखने का काम पुलिस की ओर से किया गया।
- अंकित फौज में है। वह पश्चिम बंगाल में तैनात है। इसकी जानकारी पुलिस को क्यों नहीं हो सकी।
- पुलिस ने फौज के आला अफसरों को अंकित के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज होने और उसके गलत नाम से नौकरी करने की जानकारी क्यों नहीं दी।
- 22 जुलाई 2019 को घटना के बाद भी पुलिस आखिर किस वजह से मुख्य आरोपी को बचाने में जुटी रही।
- मृतक के परिजनों के अंकित की जगह आदित्य के नाम से सरेंडर करने की जानकारी देने के बाद भी पुलिस ने क्यों सक्रियता नहीं दिखाई।
दोषियों के खिलाफ जांच भी सुस्त
दोषी अफसरों के खिलाफ चल रही जांच में भी पुलिस की सुस्ती दिख रही है। इतना बड़ा मामला होने के बाद भी अभी तक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। हाईकोर्ट की ओर से पांच मार्च को एडीजी और एसपी को तलब किया गया है।