कन्नौज। कानपुर में हुई मुठभेड़ ने चौदह साल पहले जिले में तैनात रहे जांबाज एसओ रामराज यादव की शहादत को ताजा कर दिया। फर्रुखाबाद में हुई मुठभेड़ में कलुआ गिरोह के चार बदमाशों को मार गिराया था लेकिन बाद में गोली लगने से एसओ व सिपाही शहीद हो गए थे।
खूंखार डकैत कलुआ का कन्नौज, फर्रुखाबाद और मैनपुरी के कटरी में आतंक था। दरोगा रामराज फर्रुखाबाद में एसओजी के प्रभारी रहे थे, उसके बाद उनका तबादला कन्नौज हो गया, यहां उन्हें तिर्वा कोतवाल बनाया गया। 16 सितंबर 2006 को रात नौ बजे फर्रुखाबाद और कन्नौज पुलिस को फर्रुखाबाद के कटरी इलाके में गंगा किनारे कलुआ गैंग के होने की सूचना मिली। फर्रुखाबाद पुलिस ने रामराज यादव से मदद मांगी। कच्चा रास्ता होने के कारण एसओ रामराज यादव बाइक से एक सिपाही को लेकर कटरी में कलुआ गैंग के करीब पहुंच गए। करीब आधे घंटे तक चली मुठभेड़ में एसओ ने चार बदमाशों को ढेर कर दिया। इसके कुछ ही देर बाद बदमाशों की गोलियों से एसओ व सिपाही गंभीर रूप से घायल हो गए। लोहिया अस्पताल फर्रुखाबाद में इलाज के दौरान एसओ और सिपाही ने दम तोड़ दिया।
पुलिस मुख्यालय में तैनात हैं रामराज की पत्नी
कन्नौज। शहीद रामराज यादव की पत्नी तारा देवी यादव पुलिस में दरोगा हैं। इस समय उनकी तैनाती पुलिस मुख्यालय लखनऊ में है। उन्होंने बताया कि पति के शहीद होने के बाद सरकार की ओर से गैस एजेंसी दी गई थी, लेकिन वह पुलिस में आकर पति के सपनों को पूरा करना चाहती थीं। लिहाजा 2010 में एसआई के पद पर सरकार ने उन्हें नौकरी दे दी। ट्रेनिंग के बाद वह वाराणसी के शिवपुर थाना की प्रभारी रहीं। उनके दो बच्चे हैं।