कन्नौज। दो वर्ष से मक्के की फसल पर फॉल आर्मीवर्म नामक कीट का प्रकोप देखा जा रहा है। इस कीट के हमले से फसल का उत्पादन प्रभावित हुआ है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी संतलाल गुप्ता ने किसानों को इस कीट से बचाव के लिए जागरूक किया है।
उन्होंने बताया कि यह बहुभोजी कीट मक्के के साथ अन्य फसलों को भी नुकसान पहुंचाता है। जानकारी के अभाव में किसान अक्सर अप्रमाणित दवाइयों का प्रयोग कर रहे हैं। फॉल आर्मीवर्म जलवायु के अनुकूल एक हानिकारक कीट है। इसकी मादा पत्तियों की निचली सतह पर अंडे देती है। अंडे एक से अधिक परत में होते हैं और सफेद झाग से ढके रहते हैं। ये अंडे हल्के पीले और भूरे रंग के होते हैं। इस कीट की सूंडी लार्वा अवस्था सर्वाधिक हानिकारक मानी जाती है। यह कीट मक्का, ज्वार, बाजरा, धान और गन्ना सहित लगभग 80 फसलों पर अपना जीवन चक्र पूरा कर सकता है। मक्का इस कीट की सबसे रुचिकर फसल है।
उन्होंने किसानों को कीटनाशक दवा का प्रयोग करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि कम से कम 120 लीटर पानी का प्रयोग करें। इससे पौधों को आवश्यक दवा सही मात्रा में मिल सकेगी। फसल के आरंभ में ही बीमारी की पहचान होने पर दवा का प्रयोग कर नुकसान को कम किया जा सकता है। कीट का प्रकोप दिखाई देने पर किसानों को सहयोगी फसल निगरानी एवं निदान प्रणाली के व्हाट्सएप नंबर पर फोटो भेजने को कहा गया है। इसके अतिरिक्त, फॉल आर्मीवर्म के अंडों को एकत्र करके नष्ट करना भी एक प्रभावी उपाय है। यह कीट के फैलाव को रोकने में मदद करेगा।