कन्नौज। बंदरों के उत्पात से नगर और गांव के लोग सहमे हैं। बंदरों की टोली घरों पर धावा बोलकर लोगों को निशाना बना रही है। नगर से लेकर गांव तक बंदरों को काबू करने के लिए नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत व ग्राम पंचायत संजीदा नहीं हैं। इस मामले में ईओ का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया न होने से बंदर नहीं पकड़े जा रहे हैं।
बंदराें की लगातार बढ़ती संख्या से लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है। घरों से लेकर छतों तक बंदरों का आतंक है। बंदरों के हमले से कई लोगों की जान भी जा चुकी है। जिले में पांच हजार से अधिक बंदर हैं। बंदरों ने पूरे जिले में आतंक मचा रखा है। कलक्ट्रेट, विकास भवन, तहसील, जिला अस्पताल, बस अड्डा, रेलवे स्टेशन से लेकर सहित सार्वजनिक स्थलों पर बंदरों की उछलकूद से जन जीवन प्रभावित है।
जिला मुख्यालय के सरायमीरा, मकरंदनगर से लेकर मानीमऊ, जसोदा, जलालाबाद, गुरसहायगंज, छिबरामऊ, तिर्वा में भी बंदरों का उत्पात जारी है। लोगों ने बंदरों से बचने के लिए घरों पर जाली लगा रखी है। बंदर लोगों का कीमती सामान छीन कर भाग जाते हैं। रेलवे और परिवहन विभाग ने जगह-जगह इसको लेकर स्लोगन भी लिख रखे हैं। हालांकि बंदरों से बचने का कोई इंतजाम न होने के कारण यात्री शिकार हो जाते हैं। कई नगर निकायों ने बंदरों को पकड़ने के लिए टेंडर प्रक्रिया ही नहीं की। इससे बंदर नहीं पकड़े जा सके हैं।
नगर पालिका परिषद के ईओ श्यामेंद्र मोहन चौधरी ने बताया कि उनके पास बंदर पकड़ने का इंतजाम नहीं है। बंदर पकड़ने के लिए टेंडर प्रक्रिया की जाती है। यहां अभी तक टेंडर प्रक्रिया नहीं हुई है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर टेंडर प्रक्रिया की जाएगी।
प्रतिमाह प्रशासन के पास आ रहीं 50 शिकायतें
आईजीआरएस के माध्यम से छिबरामऊ, तिर्वा और सदर से प्रतिमाह बंदरों से जुड़ी 50 से अधिक शिकायतें आ रही हैं। ये शिकायतें वन विभाग के पास भेज दी जाती हैं। वन विभाग बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी का ठीकरा नगर निकाय और ग्राम पंचायत पर फोड़ देता है। इसके बाद शिकायतें ठंडे बस्ते में डाल दी जाती हैं।
शासन से जारी हुआ था पत्र
पर्यावरण एवं जलवायु विभाग के विशेष सचिव ने नौ जनवरी 2023 को पत्र भेजा था। कहा था कि आईजीआरएस में बड़ी संख्या में बंदर पकड़ने के प्रकरण आते हैं। बंदर पकड़ने की जिम्मेदारी नगरीय क्षेत्र में नगर पालिका, नगर पंचायत और ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम पंचायत की है। बंदर पकड़ने प्रशिक्षित लोगों की सेवाएं लेकर बंदरों को जंगल में छोड़ने का कार्य कराया जाए।
इनकी हो चुकी मौत
-फरवरी 2017 में कस्साबान निवासी 24 वर्षीय रोहित मिश्रा की मौत हो चुकी है।
-दिसंबर 2017 में बंदर के धक्के से रौतामई निवासी 55 वर्षीय विद्यावती की मौत हो चुकी है।
-जून 2018 में आंबेडकर नगर निवासी 20 वर्षीय नवनीत की मौत हो चुकी है।
-मई 2022 में रायपुर निवासी जगरूप सिंह की मौत हो चुकी है।
-सितंबर 2022 में छिबरामऊ के बजरिया निवासी 55 वर्षीय किसान महेशचंद की मौत हो चुकी है।