तिर्वा। हसेरन तहसील बनाए जाने के विरोध में वकीलों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। मंगलवार को भी अधिवक्ताओं ने 11वें दिन कलमबंद हड़ताल जारी रखी। सुबह से ही वकील एसडीएम कार्यालय के पास एकजुट होकर धरने पर बैठ गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
हड़ताल में शामिल वकीलों का कहना है कि प्रशासन का निर्णय जल्दबाजी में लिया गया है, जिससे तिर्वा और प्रस्तावित हसेरन दोनों तहसीलों पर कार्यभार का असर पड़ेगा। उनका मत है कि नई तहसील बनने से मौजूदा व्यवस्था प्रभावित होगी और राजस्व कार्यों में असंतुलन पैदा होगा। हड़ताल के चलते तहसील का कामकाज पूरी तरह ठप रहा। प्रमाणपत्र, नामांतरण, दस्तावेज सत्यापन जैसे कार्यों के लिए पहुंचे किसान और ग्रामीण निराश होकर लौट गए।
फरियादियों ने बताया कि रोजमर्रा के काम ठप पड़ने से उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वकीलों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया, तो आंदोलन को जिला मुख्यालय तक ले जाया जाएगा। उनका आरोप है कि शासन ने बिना जनभावनाएं समझे और स्थानीय आवश्यकताओं का अध्ययन किए ही जल्दबाजी में निर्णय लिया है, जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ेगा। धरना स्थल पर अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों ने दोहराया कि शासन स्तर पर उचित निर्णय लेकर समाधान निकालें।