ग्राम नवादा स्थित महर्षि निशंक इंटर कालेज में शनिवार को बच्चों के बीमार होने की सूचना मिलते ही अभिभावकों दौड़ पड़े। जिन लोगों के बच्चे स्कूल में नहीं पढ़ते थे, वे भी विद्यालय पहुंच गए और आनन- फानन में बच्चों को अस्पताल पहुंचाया गया।
अस्पताल पहुंचे अभिभावक अध्यापकों पर आरोप लगाने लगे। इस दौरान तू-तू-मैं-मैं की स्थिति भी बनी। हालांकि बाद में लोगों ने समझा बुझाकर शांत कराया। दवा पीकर बीमार होने वाली नवादा निवासी वंदना (13), कल्पना, राधिका, रचना (12), कोमल (10), मोहिनी, गौरी, रेखा (12), रीमा (14), प्रियंका (13), दिव्या (14), कोमल (14), अजय कुमार (12), आदित्य तिवारी (14), मोहित (12), खुशबू (13), अंजू (12), दीक्षा, शिवानी, रचना, राबिया (12) आदि को जिला अस्पताल रेफर किया गया।
पिलखिया गांव निवासी ज्योति, फकरपुर गांव निवासी शोभा, नवादा निवासी अजय, कछपुरवा की रागिनी, परीक्षितपुर की प्रीति, जहांगीरपुर की रवीना, कड़ाहा की कोमल व नवादा निवासी सौरभ को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
बच्चों के पेट के कीड़े मारने वाली दवा जिले के साथ प्रदेश भर में खिलाई जा रही है, लेकिन सिर्फ नवादा के विद्यालय में बच्चों को दवा देने में समस्या पैदा हुई है, यह जांच का विषय है। प्रभारी सीएमएस डा. एके पचौरी ने कहा एल्मेंडाजोल दवा का एक प्रतिशत ही साइड डिफेक्ट होता है। यह दवा खाली पेट नहीं दी जाती।
पेट के कीडे़ मारने की दवा खाने से बच्चों का बीमार होना गंभीर बात है। इस मामले की जांच कराई जाएगी। कालेज में बची हुई दवा को कब्जे में ले लिया गया है। मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई है। इसमें एसडीएम छिबरामऊ, नोडल अधिकारी जेआर सिंह, डिप्टी सीएमओ डा. केसी राय जांच करेंगे।