गुगरापुर(कन्नौज)। पाले से किसानों को फसल में नुकसान का डर सताने लगा है। आलू की फसल में झुलसा रोग ने दांव धर दिया है। इससे पैदावार गिरने की आशंका बढ़ गई है।
किसानों को पाले की मार से फसल बचाने की चिंता सताने लगी है। किसानों को डर है कि कहीं पाले से फसल खराब न हो जाए। दिसंबर से जनवरी के बीच आलू, मटर और सरसों जैसी रबी की फसलों को झुलसा रोग से सबसे अधिक नुकसान होने की आशंका रहती है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. वीके कनौजिया के अनुसार किसान इस समय सही तकनीक अपनाकर फसलों को बचा सकते हैं। दिसंबर में कोहरा और सर्दी बढ़ने से फसलों में पाला और शीत लहर की समस्या बढ़ जाती है। इस समय फसलों को ज्यादा नुकसान हो जाता है।
इन फसलों में है नुकसान की आशंका
टमाटर, आलू, मिर्च, बैंगन, भिंडी आदि सब्जियों, पपीता, आम, केला के पौधों, मटर, चना, अलसी, जीरा, धनिया, सौंफ आदि फसलों में 80 से 90 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता। आलू, अरहर, चना, सरसों, गेहूं, जौ आदि फसलों में भी नुकसान की आशंका है।
इस तरह पड़ता है पाला
कृषि वैज्ञानिक केंद्र अनौगी के डॉ. वीके कनौजिया ने बताया कि आसमान साफ हो, हवा न चल रही हो और तापमान कम हो जाए, तब पाले की आशंका बढ़ जाती है। दिन के समय सूर्य की गर्मी से पृथ्वी गर्म हो जाती है। जमीन से गर्मी विकरण के जरिए वातावरण में स्थानांतरित हो जाती है। रात में जमीन का तापमान गिर जाता है। जमीन को गर्मी नहीं मिलती है। तापमान जीरो डिग्री सेल्सियस या इससे भी कम हो जाता है। यह पाले की अवस्था है।
नर्सरी में होता है सबसे ज्यादा नुकसान
पाले से सबसे अधिक नुकसान नर्सरी में होता है। पौधों को लो प्लीटर्नल की चादर से ढकना चाहिए। ऐसा करने से प्लास्टिक के अंदर का तापमान दो से तीन डिग्री सेल्सियस बढ़ जाता है। गांव में पुआल का इस्तेमाल पौधों पर रखने के लिए भी किया जा सकता है। पौधों का दक्षिण-पूर्वी भाग खुला रहे। इससे कि पौधों को सुबह व दोपहर धूप मिलती रहे।
पौधे टाट की पल्ली या पुआल से ढक दें
पपीता, आम के छोटे पेड़ को टाट की पल्ली अथवा पुआल से ढक दें। इससे अंदर का तापमान बढ़ जाता है। यह पौधे को बढ़ने में मदद करता है।
फसलों में दिन में करें फव्वारा सिंचाई
पाला पड़ने की आशंका हो या मौसम पूर्वानुमान विभाग ने पाले की चेतावनी दी हो, तो फसल में हल्की सिंचाई करनी चाहिए। इससे तापमान जीरो डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं गिरेगा। फसल पर पाले का प्रभाव भी नहीं पड़ेगा।
गंधक के तेजाब का करें छिड़काव
पाले की आशंका वाले दिन फसल पर गंधक के तेजाब जीरो प्वाइंट एक का छिड़काव करें। तेजाब से फसल के आसपास के वातावरण में तापमान बढ़ जाता है। तापमान जमाव बिंदु तक नहीं पहुंच पाता है। बाढ़ लगाकर भी फसल को बचाया जा सकता है।