कन्नौज। लेखपाल संवर्ग 10 वर्षों से अपनी जायज मांगों के लिए संघर्षरत है। परिषद व शासन द्वारा लेखपाल संवर्ग की लंबित एवं न्यायोचित मांगों पर सकारात्मक और प्रभावी कार्यवाही न होने पर प्रदेश के समस्त लेखपालों ने 22 सितंबर से अतिरिक्त हल्कों का बहिष्कार किया है। राजस्व परिषद व शासन द्वारा ध्यान आकृष्ट न किए जाने से समस्त लेखपालों में भारी निराशा व आक्रोश व्याप्त है।
लेखपाल संघ का कहना है कि उनका विरोध राजस्व परिषद व शासन की कार्यप्रणाली को लेकर है। आठ वर्षों से सिर्फ लेखपालों का अंतर मंडलीय स्थानांतरण नहीं हुआ है। इसके अलावा विगत दो वर्षों से लेखपालों की पदोन्नति सूची जारी नहीं हुई है और विगत 16 वर्षों से भत्ता बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। विगत वर्ष से नवनियुक्त लेखपालों का परीक्षा परिणाम घोषित न करना और स्थायीकरण न होना भी चिंता का विषय है।
संघ ने आरोप लगाया कि परिषद का आदेश जारी होने के बाद भी लेखपालों को पटल सहायक और प्रभारी राजस्व निरीक्षक के कार्यों से अवमुक्त नहीं किया जा रहा है। विगत 10 वर्षों से लेखपालों को तकनीकी पद घोषित नहीं किया गया है। वहीं ग्राम सचिवालय में बिना आधारभूत सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था और भत्ता बढ़ोत्तरी के लेखपालों का रोस्टर लगाया जा रहा है।