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कोविड अस्पताल की खिड़की से गिरकर विधायक के भाई की मौत

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खिड़की के नीचे घायल अवस्‍था में पड़े संजय राजपूत। - फोटो : KANNAUJ
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कन्नौज/तिर्वा। तिर्वा से भाजपा विधायक कैलाश राजपूत के कोरोना संक्रमित छोटे भाई की शुक्रवार दोपहर तिर्वा मेडिकल कॉलेज की दूसरी मंजिल में लगी खिड़की से गिरकर मौत हो गई। हालत बिगड़ने पर सुबह ही उन्हें कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह अस्पताल में भर्ती नहीं होना चाहते थे, अस्पताल पहुंचते ही हंगामा भी किया था। हादसे के बाद डीएम और एसपी ने मौके पर जाकर जानकारी ली। पुलिस हत्या और आत्महत्या दोनों ही बिंदुओं पर जांच कर रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर में चोट और पसलियां टूटने से मौत होने की पुष्टि हुई है।
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तिर्वा से भाजपा विधायक कैलाश राजपूत के छोटे भाई संजय राजपूत (48) पुत्र निरोत्तम की 25 अगस्त को कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आई थी। जांच के बाद पत्नी और परिवार के अन्य लोग भी पॉजिटिव निकले थे। सभी को छिबरामऊ के गढ़िया आवास पर आईसोलेट कर दिया गया था।
शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे संजय की तबीयत बिगड़ गई। इस पर विधायक ने उन्हें तिर्वा मेडिकल कालेज के कोविड-19 अस्पताल में दूसरी मंजिल पर बने आरक्षित वार्ड में भर्ती करा दिया। दोपहर लगभग ढाई बजे संजय संदिग्ध हालात में झोले के साथ खिड़की से गिर गए। उन्हें इमरजेंसी में भर्ती कराया गया, जहां आधा घंटे बाद मौत हो गई। सूचना मिलने पर समर्थकों के साथ विधायक कैलाश के अलावा भाजपा जिलाध्यक्ष नरेन्द्र राजपूत, पूर्व जिलाध्यक्ष आनंद सिंह, सुभाष वर्मा, सतीश राजपूत आदि मेडिकल कॉलेज पहुंच गए। सीएमएस डॉ. दिलीप सिंह ने बताया कि पैर फिसलने से संजय खिड़की से गिर गए थे। डीएम राकेश कुमार मिश्रा और एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह ने भी मौके पर पहुंचकर जानकारी ली। उन्होंने खिड़की की ऊंचाई को भी देखा।
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तिर्वा सीओ दीपक दुबे ने बताया पूछताछ में पैर फिसलने से खिड़की से गिरने के कारण मौत होने की बात सामने आ रही है। हादसा और आत्महत्या दोनों बिंदु पर जांच की जा रही है। शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। विधायक ने बताया कि झोला उठाते समय संजय का संतुलन बिगड़ गया, इससे वह खिड़की से गिर गए। इससे उनकी मौत हो गई। संजय का 15 वर्षीय एक बेटा उत्कर्ष है।
भर्ती नहीं होना चाहते थे संजय, अस्पताल में किया था हंगामा
कन्नौज। तिर्वा विधायक कैलाश राजपूत के भाई संजय परिवार से अलग अस्पताल में भर्ती नहीं होना चाहते थे। उन्होंने मेडिकल कॉलेज के कोरोना अस्पताल पहुंचते ही हंगामा शुरू कर दिया था। चिकित्साकर्मियों ने किसी तरह समझाकर उन्हें शांत कराया। कर्मियों के जाते ही वह खिड़की से नीचे गिर गए। इमरजेंसी में कुछ ही देर बाद मौत हो गई।
विधायक कैलाश राजपूत के भाई संजय राजपूत के अलावा उनकी पत्नी और परिवार के लोग भी कोरोना संक्रमित हैं। संजय के साथ परिवार के लोगों को घर में ही आईसोलेट किया गया था। शुक्रवार सुबह सुबह हालत बिगड़ने पर विधायक ने संजय को मेडिकल कालेज भिजवा दिया। मेडिकल कालेज पहुंचते ही उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया, क्योंकि परिवार के लोगों से अलग होकर भर्ती होना नहीं चाहते थे।
चिकित्सकों ने किसी तरह संजय को शांत कराया और दूसरे कमरे में चले गए। कुछ ही देर बाद किसी के नीचे गिरने की आवाज आई। कर्मचारियों ने दूसरे कमरे की खिड़की देखा तो संजय नीचे खून से लथपथ पड़े थे। कर्मचारियों ने इसकी सूचना चिकित्सकों को दी। मौके पर कर्मचारियों और मरीजों की भीड़ लग गई। मदद के बजाए कुछ लोग वीडियो भी बनाने लगे। स्वास्थ्य कर्मियों ने संजय को इमरजेंसी में पहुंचाया, जहां उनका इलाज शुरू किया गया। सीएमएस डा. दिलीप सिंह ने फोन पर विधायक को जानकारी दी। विधायक मेडिकल कॉलेज पहुंचते उससे पहले ही संजय ने दम तोड़ दिया।
सीएमएस ने बताया कि संजय घर पर ही इलाज कराना चाह रहे थे। उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने के कारण भर्ती करना पड़ा था। उन्होंने भर्ती होने का विरोध भी किया था। विधायक ने बताया कि वह पांच भाई हैं। संजय चौथे नंबर पर थे। उनके बाद बलवीर,रनवीर और सबसे छोटे संतोष हैं।
सिर में गंभीर चोटें, पसलियां भी टूटीं
संजय के शव का रात करीब साढ़े आठ बजे सौ शय्या अस्पताल के डा. शोभित और सीएचसी अमोलर के डा. अमित कुमार ने पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर के पीछले हिस्से में गंभीर चोटें आने से मौत होना बताया गया है। पसलियां भी टूट गईं थीं। कुछ पसलियां टूटकर फेफड़ों में घुसी गईं थीं।
शव देख विधायक के चालक को पड़ा दिल का दौरा
संजय का शव देखते ही विधायक के चालक उमेश को दिल का दौरा पड़ गया। उन्हें इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। सीएमएस डा.दिलीप सिंह ने बताया कि विधायक का चालक उमेश ह्दय रोग से पीड़ित है।
20 फीट है खिड़की की ऊंचाई
संजय दूसरी मंजिल की जिस खिड़की से गिरे उसकी जमीन से ऊंचाई करीब 20 फीट है। नीचे पक्की फर्श और पक्की नाली बनी है। ऊपर से वह नाली और फर्श पर गिरे। तिर्वा कोतवाल इंद्रपाल सरोज का कहना है कि नाली की जगह अगर वह समतल में गिरे होते है, तो शायद कम चोटें आतीं।
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