फोटो 12- घुइयां की फसल दिखाता किसान।
फोटो 13- किसान लालमन
घुइयां ने किसानों को दिखाई उन्नति की राह
एक बीघा में 16 हजार रुपये लागत लगा कर रहे डेढ़ लाख तक कमाई
क्रॉसर
तालग्राम क्षेत्र के कई गांवों में बढ़ा घुइयां का रकबा
संवाद न्यूज एजेंसी
तालग्राम। आलू उत्पादक जिले में किसान घुइयां की खेती कर अच्छा मुनाफा ले रहे हैं। प्रति बीघा 16 हजार की लागत में डेढ़ लाख तक कमाई होने से तालग्राम क्षेत्र के कई गांवों में घुइयां की खेती की जाने लगी है। एक बीघा से शुरू हुआ खेती का रकबा कई एकड़ तक पहुंच गया है।
किसान लालमन वर्मा ने घुइयां की खेती की शुरुआत की थी। उन्होंने एक बीघा में घुइयां की बुआई प्रयोग के तौर पर की थी। उन्होंने बताया कि करीब 16 हजार रुपये लागत आई थी। 120 दिन में फसल तैयार हो गई। करीब डेढ़ लाख रुपये में उपज बेची थी। सात हजार रुपये की दर से डेढ़ क्विंटल बीजा बोया के अलावा जुताई, खाद, सिंचाई, निराई, खरपतवार व कीटनाशक पर खर्च किए। इस बार भी एक बीघा में फसल तैयार है। इसमें 48 से 50 क्विंटल पैदावार होने का अनुमान है। बाजार में भाव तीस रुपये किलो चल रहा है, इससे डेढ़ लाख रुपये तक आय होने की संभावना है। लालमन को देखकर क्षेत्र में ताहपुर, चौतराहर, गदनापुुर लोधी, रंनापुर्वा, अतरौली, कैथनपुर्वा गांवों के कई किसान घुइयां की खेती करने लगे हैं। जिला उद्यान अधिकारी मनोज चतुर्वेदी ने बताया कि यह फसल मार्च-अप्रैल और जून-जुलाई में बोई जाती है। 110 से 120 दिनों में फसल तैयार हो जाती है। छह बार खेत की जुताई, और कम से कम 10 सिंचाई करनी पड़ती है।
फोटो 14- किसान संजय कुमार
बेहतर पैदावार से बढ़ रहा दायरा
किसान संजय कुमार ने बताया कि अधिक मुनाफा के चलते घुइयां का क्षेत्रफल बढ़ने लगा है। पहले गांव में एक दो बीघा ही घुइयां का रकबा था, इस बार सात एकड़ में बुआई की गई है। किसान कृषि वैज्ञानिकों से राय लेकर तकनीकी खेती करने लगे हैं। घुइयां की खेती में अच्छा मुनाफा है।
फोटो 15- किसान गंगाराम
पत्तों के भी मिलते अच्छे दाम
किसान गंगाराम का कहना है घुइयां की खेती दोहरा लाभ देती है बुआई के 60 दिन बाद फसल में कल्ले निकलने लगते हैं। जो निराई के समय काट कर गड्डियां बना कर दस रुपये की चार या पांच गड्डी के हिसाब से बाजार में बिक जाते हैं। खुदाई के समय पौधे का बीच के किल्ले (पत्ते) अच्छे दामों में बिकते हैं।