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Kannauj News: दस्तावेज पंजीकरण का काम निजी कंपनियों को सौंपने का विरोध

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कन्नौज। दस्तावेज पंजीकरण का काम निजी कंपनियों को सौंपने के फैसले के खिलाफ अधिवक्ताओं ने गुरुवार को मोर्चा खोल दिया है। अधिवक्ताओं ने बैठक कर शनिवार तक न्यायिक व निबंधन कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह फैसला आम जनता के लिए खतरनाक है और इसके गंभीर परिणाम होंगे।
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अधिवक्ताओं का तर्क है कि पंजीकरण में तकनीकी से अधिक कानूनी समझ की जरूरत होती है। बैनामा, वसीयत, बंटवारा, गिफ्ट डीड जैसी दस्तावेजों में भाषा, स्टांप, वैधता और भविष्य के विवाद छिपे होते हैं। निजी कंपनी का कर्मचारी टाइपिंग तो कर देगा, पर कानूनी बारीकियां नहीं समझ पाएगा। इससे गलत दस्तावेज बनेंगे, मुकदमों की संख्या बढ़ेगी और आम आदमी कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटेगा। अधिवक्ताओं ने कहा कि इससे भ्रष्टाचार बढ़ जाएगा। टेंडर, कमीशन और डीलिंग का नया रास्ता खुल जाएगा। सबसे ज्यादा मार दस्तावेज लेखकों पर पड़ेगी।
दशकों से ये लोग तहसील में बैठकर गरीब, अनपढ़ लोगों की मदद करते आए हैं। हिंदी में ड्राफ्ट बनाना, गवाह दिलाना, फार्म भरते हैं। निजी कंपनी आने से राइटर बेरोजगार हो जाएंगे। उनके परिवार का चूल्हा बुझ जाएगा। अधिवक्ताओं ने मांग की कि पंजीकरण सरकारी कर्मचारियों के हाथ में ही रहे। अगर कंप्यूटराइजेशन जरूरी है तो सरकारी लिपिकों को प्रशिक्षण दिया जाए, लेखकों को मान्यता देकर जोड़ा जाए। निजीकरण से पारदर्शिता नहीं, सिर्फ ठेकेदारी आएगी।
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अधिवक्ताओं ने शनिवार को बैठक में कठोर निर्णय लेने का फैसला लिया है। इस दौरान अध्यक्ष सदर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहम्मद नाजिम अख्तर, अधिवक्ता एसोसिएशन कलक्ट्रेट के अध्यक्ष हीरालाल, जिला लायंस बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव, रामदेव शुक्ला, अजय कुमार यादव आदि मौजूद रहे।
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