गांवों में पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई
कामधेनु योजना में का हाल बदहाल है। अफसरों के ढुलमुल रवैये और बैंकों की
लापरवाही से योजना की शुरूआत में दिया गया लक्ष्य भी पूरा नहीं हो पाया है।
इसके चलते शासन ने इस साल कोई लक्ष्य नहीं दिया है। पुराने लक्ष्य को ही
पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
आलम यह है कि दो साल में कामधेनु
योजना में दो और मिनी कामधेनु में सिर्फ एक डेयरी ही खुल पाई है। विभाग और
बैंकों के चक्कर लगाते-लगाते आवेदक परेशान हैं।
विकास भवन स्थित
जिला पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय के अनुसार कामधेनु योजना में बीते सालों
का ही लक्ष्य अभी तक पूरा नहीं हो सका है। इस कारण इस साल शासन से कोई नया
लक्ष्य नहीं दिया गया है। पुराने लक्ष्य को ही पूरा करने के निर्देश दिए गए
हैं।
एक करोड़ रुपये से अधिक ऋण की सुविधा दिलाने के लिए शुरू की
गई कामधेनु योजना के तहत कम से कम 6 दूध डेयरी शुरू कराने का लक्ष्य रखा
गया था। तमाम कोशिशों के बाद दो साल में अब तक गीता आर्या गुरसहायगंज और
पूजा वाजपेयी तहसीपुर के यहां ही डेयरी शुरू हो सकी है।
यही हाल 50
लाख रुपये तक के ऋण से शुरू होने वाली मिनी कामधेनु डेयरी योजना का है।
जिले में 30 लाभार्थियों को चुनकर डेयरी स्थापना कराने का लक्ष्य था। इसमें
राधारमण डेयरी सरायमीरा ही शुरू हो सकी है। मिनी कामधेनु डेयरी स्थापित
कराने के लिए करीब 70 किसानों ने आवेदन किया है।
इनमें से प्राथमिक
तौर पर 40 किसानों का पशुपालन विभाग की तरफ से चयन किया गया। लेकिन बैंक
से ऋण मिलने समेत अन्य कागजी औपचारिकताओं के चक्कर में आगे की प्रक्रिया
अटक गई है।
तिर्वा क्षेत्र के हरिओम यादव ने बताया कि एक साल तक
कामधेनु डेयरी योजना के लिए दौड़भाग की। लेकिन सफलता नहीं मिली। बैंकों ने
बाल में खाल निकालने वाले अंदाज में इतना परेशान किया कि धैर्य जवाब दे
गया। अब मजबूर होकर मिनी कामधेनु डेयरी खोलने की प्रक्रिया शुरू की है।
यही
हाल कई अन्य पशुपालकों का है जो इस योजना के तहत काम करना चाहते हैं।
लेटलतीफी का आलम देखकर पशुपालक इस योजना से कन्नी काटने लगे हैं।
कामधेनु
डेयरी योजना के तहत सात प्रार्थनापत्र बैंकों में भेजे जा चुके हैं,
जिनमें तीन स्वीकृत हो गए हैं। नरेंद्र सिंह यादव तिर्वा वहसार, आनंद
गुप्ता छिबरामऊ भीखमपुर सानी, दिलीप गुप्ता कन्नौज के यहां जल्द मिनी
कामधेनु डेयरी खुल जाएगी। मिनी कामधेनी डेयरी के लिए एक दर्जन लाभार्थी
अपने यहां इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करा रहे हैं। जमीन संबंधी औपचारिकता
पूरी होते ही पशुओं की खरीद करा दी जाएगी।
- डा. अमरेंद्र सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, कन्नौज।