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गांव के होनहारों में एक था बाबू

Sun, 13 Sep 2015 11:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो कन्नौज
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मुश्किल हालात में भी मुस्कराते रहने वाले बाबू सिंह के इस कदम से गांव का हर शख्स स्तब्ध है। उसके संपर्क के रहने वाले किसी व्यक्ति ने भी ऐसा नहीं सोचा था कि वह आत्महत्या जैसा कदम भी उठा लेगा। छोटे से गांव में रहते हुए उसने हर परेशानी का हंसकर सामना किया।
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विपरीत परिस्थितयों से जूझते हुए पढ़ाई की और नौकरी भी पाई। तकलीफ में भी उसके चेहरे पर हंसी नजर आती थी। यही वजह रही कि हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद जब वह बुरी तरह से टूटा तो किसी को उसके दर्द का एहसास तक नहीं हुआ।

बेहद गरीब परिवार में जन्मे शिक्षामित्र बाबू सिंह की गिनती गांव के होनहार युवाओं में होती थी। गांव की युवा पीढ़ी उसे आदर्श के तौर पर देखती रही है। विपरीत हालातों में पढ़ाई-लिखाई करके शिक्षामित्र की नौकरी पाई। अपने भाइयों का भी कैरियर बनाने की दिशा में कदम आगे बढ़ाए। उसने न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे गांव में शिक्षा की अलख जगाई। छोटे भाई रंजीत ने बताया कि बड़े भाई ने हमेशा शिक्षा की अहमियत का एहसास कराया।
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बीएससी करने के बाद इंजीनियर बनने के ख्वाब को साकार करने के लिए कानपुर नगर के बिल्हौर कस्बा स्थित इंडस इंजीनियरिंग कालेज में उसका दाखिला कराया। यहां वहां कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग पढ़ाई कर रहा है। हास्टल खर्च आदि का इंतजाम भाई ही करते थे।

वहीं दूसरे भाई शिवपाल ने बताया कि वह कानपुर में रहकर सिविल सर्विसेज की तैयारी में जुटा है। पूरे परिवार को एकता के सूत्र में बांधने वाला बाबू सिंह भाई-बहनों के लिए अभिभावक की भूमिका निभाता था। ऐसे में भाइयों की पढ़ाई का खर्च, बहन की शादी की चिंता के बीच आर्थिक संकट से जूझ रहे शिक्षामित्र की उम्मीद हाईकोर्ट के फैसले के बाद टूट गई।

खुद कर बैठा गलत फैसला
तिर्वा। उचित फैसले लेने और दूसरे को सही रास्ता दिखाने के कारण गांव में लोकप्रिय बाबू सिंह के आत्महत्या के फैसले को हर किसी ने गलत ठहराया। ग्रामीणों का कहना था कि जिनके लिए चिंतित होकर उसनेयह कदम उठाया उससे उनकी ही समस्याएं बढ़ गई हैं।

शिक्षामित्र संघ के नेता मानवेंद्र सिंह, उप्र प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ के ब्लाक अध्यक्ष ह्रदयेश दुबे का कहना है कि किसी को भी जिंदगी से हार नहीं माननी चाहिए। हालात चाहे जैसे भी हों उनका सामना करने से ही मुश्किलें हल होती हैं। उन्होंने जिले भर के शिक्षा मित्रों से आह्वान किया कि वे संकट की घड़ी में धैर्य से काम लें।

बिना किसी को परेशान किए करेंगे आंदोलन
तिर्वा। शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष मानवेंद्र सिंह ने कहा कि न्याय के लिए शिक्षामित्र आरपार का आंदोलन करेंगे। उनका आंदोलन शिक्षामित्रों को न्याय दिलाएगा। इस आंदोलन के दौरान पब्लिक को कोई परेशानी नहीं होने देंगे। कोई ऐसा काम नहीं करेंगे जिससे जन हानि हो या किसी को नुकसान पहुंचे।

ननिहाल में भी गम का माहौल
तिर्वा। शिक्षामित्र की ननिहाल सदर कोतवाली के गांव इमलियापुर में है। घटना की जानकारी मिलते ही दर्जनों महिलाएं व पुरुष पोस्टमार्टम हाउस की ओर रोते-बिलखते दौड़े। मामा रामकुमार ने बताया कि जब भी वह ननिहाल आता था तो आस पड़ोस के लोगों से मिलता था। मृदुभाषी और व्यवहार कुशल होनेे के साथ ही वह हंसी-मजाक भी खूब करता था। इस कारण उससे जुड़ी यादें अब आंख से आंसू बनकर निकल रही हैं।

एसडीएम ने सुरक्षा इंतजाम देखे
कन्नौज। शिक्षामित्रों के आक्रोश को देखते हुए एसडीएम सदर सुनील शुक्ला, सीओ सदर करन सिंह, कोतवाल भुल्लन यादव भारी पुलिस बल के साथ जिला अस्पताल पहुंचे। शिक्षामित्रों से बातचीत कर उन्हें भरोसा दिलाया कि संकट के वक्त प्रशासन उनके साथ है। वे शांति व्यवस्था बरकरार रखें। अपनी आवाज कानून के दायरे में रहकर उठाएं। बवाल की आशंका को देखते हुए भारी पुलिस फोर्स भी पोस्टमार्टम हाउस के पास डटा रहा।
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पत्नी व बच्चे का बुरा हाल
तिर्वा। घटना के बाद मृतक की गर्भवती पत्नी दीपा का रो-रोकर बुरा हाल है। कई बार वह सुध-बुध खो बैठी। गांव की महिलाएं बार-बार उसके चेहरे पर पानी के छींटे मारकर उसे होश में लाने का प्रयास करती रहीं। वहीं उसका ढाई साल का बेटा भी सहमा नजर आया।
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