तालग्राम। विवाह के केवल तीन मुहूर्त 12,13 और 14 मई को शेष हैं। इसके बाद अधिकमास लगने से लगभग 35 दिन तक शहनाई नहीं बजेगी। इसके बाद 19 जून से आठ जुलाई के बीच सात दिन विवाह के मुहूर्त रहेंगे। फिर करीब चार माह तक 28 नवंबर तक विवाह के मुहूर्त नहीं रहेंगे।
आचार्य पंडित कमलेश मिश्रा ने बताया कि पंचांग के अनुसार, विक्रम संवत 2083 के ज्येष्ठ मास में 17 मई से अधिकमास या मलमास प्रारंभ होगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हर तीन वर्ष में अधिकमास आता है, लेकिन कौन-सा महीना अधिक होगा, यह गणना के आधार पर तय किया जाता है।
इस बार ज्येष्ठ मास दो मई से शुरू होकर 29 जून को समाप्त होगा।
ज्येष्ठ मास के मध्य में पुरुषोत्तम मास आएगा, जो 17 मई से 15 जून तक रहेगा। 17 मई से 15 जून तक ज्येष्ठ अधिकमास होने के कारण विवाह मुहूर्त नहीं रहेंगे।
इसी तरह 16 जुलाई से आठ अगस्त तक गुरु का तारा अस्त रहने से विवाह मुहूर्त नहीं होंगे। 25 जुलाई से 20 नवंबर तक हरि शयन काल होने से भी विवाह नहीं होंगे। इस प्रकार जून से दिसंबर तक कुल 10 दिन विवाह के मुहूर्त रहेंगे।