नोटबंदी ने अगैती आलू का कारोबार तबाह कर दिया है। इस बार महाराष्ट्र व नासिक के कारोबारी खरीद करने नहीं पहुंचे। इससे आलू के भाव धड़ाम हैं। लोक ल स्तर पर खरीद हो रही है। इससे भाव लगातार गिर रहे हैं। किसानों की लागत भी वसूल नहीं हो रही है।
शहर की निगम मंडी में दिसंबर माह में आलू की खरीद के लिए नासिक और मुंबई से बड़ी संख्या में कारोबारी आ जाते थे। नोटबंदी से इस बार यह कारोबारी नहीं आए। गैरप्रांतों में आलू न जाने से भाव ऊपर नहीं जा रहे हैं। शहर की मंडी में हुंडा व्यापार होता है। आलू के पैकेट केे दाम बोली लगाकर तय किए जाते हैं। किसान को प्रति पैकेट के हिसाब से नगद भुगतान कि या जाता है। आलू के दामों में गिरावट ने किसानों की कमर तोड़ दी है।
मंडी में कच्चा आलू सौ रुपये से डेढ़ सौ रुपये प्रति पैकेट बिक रहा है। इसे स्थानीय व्यापारी ही खरीद रहे हैं। महाराष्ट्र से व्यापारी न आने से कारोबार ठंडा है। मंडी सचिव अभितेंद्र तिवारी के मुताबिक मंडी में हर साल लगभग 60 हजार मीट्रिक टन कच्चे आलू की आवक होती है। इस बार अभी तक 12 हजार मीट्रिक टन आलू ही आया है। मंडी में आलू दुकानों के बाहर लगा है। कोई खरीदने को तैयार नहीं है।