नोटबंदी ने एक और महिला की जान ले ली। परिजनों का आरोप है कि कई बार बैंक के चक्कर लगाए और समस्या से शाखा प्रबंधक को अवगत कराया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। शाखा प्रबंधक ने बताया कि युवक मिला था, लेकिन पहले दिन कैश और दूसरे दिन कनेक्टिविटी न होने से भुगतान नहीं किया जा सका।
आजाद नगर निवासी राजेंद्र कुमार ने बताया कि पिता बालकराम पीडब्लूडी में कार्यरत थे। जिनका निधन करीब एक माह पूर्व हो गया। इस गम से वह लोग उबर भी नहीं पाए थे कि बैंक से रुपये न मिलने के कारण उनकी मां का भी देहांत हो गया। उसने बताया कि मां शांति देवी (60) का स्थानीय पंजाब नेशनल बैंक में बचत खाता है। 16 दिसंबर को मां को फालिश मार गई। घर में पैसा न होने के कारण वह बीमार मां को लेकर बैंक से पैसा निकालने गया लेकिन भारी भीड़ के चलते बीमार मां को बैंक के अंदर नहीं ले जा सका।
राजेंद्र का आरोप है कि उसने शाखा प्रबंधक अंशू वर्मा से मां की बीमारी बताकर भुगतान करने की गुहार लगाई, लेकिन शाखा प्रबंधक का दिल नहीं पसीजा। इसके बाद वह दूसरे दिन बैंक गया, पर उसको रुपये नहीं मिल सके। जिससे वह मां का इलाज नहीं करा सका और बुधवार की देर शाम उसकी मौत हो गई।
वहीं शाखा प्रबंधक अंशू वर्मा ने बताया कि सोमवार को बैंक में कैश नहीं था, जबकि मंगलवार को कनेक्टिविटी फेल रही। भुगतान लेने वाले राजेंद्र ने उनसे संपर्क किया था, लेकिन स्टाफ की कमी के चलते कोई भी बैंक कर्मी शाखा के बाहर नहीं जा सका।