आचमन तो छोड़िए स्पर्श के लायक भी नहीं है गंगाजल। महादेवी घाट पर करीब आधा दर्जन मवेशियों के शव पड़े हैं। वहीं, घाट पर पॉलिथीन आदि गंदगी फैली हुई है। इससे वहां के हालात बद से बदतर हो गए हैं।
सावन में शिवभक्त गंगाजल भरकर शहर के शिवालयों में चढ़ाते हैं। इस समय स्नान घाट पर फैली गंदगी देखकर कई स्नान करने के बजाय जल छिड़क कर काम चला रहे हैं। कई भक्त तो घाटों में लगे हैंडपंप से जल लेकर जा रहे हैं। पुजारियों की माने तो शासन की ओर से कभी कोई विशेष सफाई अभियान नहीं चलाया जाता है। यदि सरकार थोड़ा ध्यान दे तो इस समस्या से निजात पाया जा सकता है।
कन्नौज के गंगा घाट पर दाहिनी ओर मेहंदी घाट पर अंतिम संस्कार किए जाते हैं। वहीं, अंतिम संस्कार के बाद परिजन, सगे, संबंधी बाएं ओर बने महादेवी घाट पर स्नान करने के लिए आते हैं। अंतिम संस्कार में पहुंच रहे लोगाें को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। परंपरा के अनुसार स्नान करना जरूरी है, लेकिन गंदगी को देखकर स्नान करते नहीं बनता है। लोगाें को कहना है कि जिला प्रशासन को यहां सफाई के इंतजाम करने चाहिए।
मां गंगा सेवा संस्थान ने सौंपा डीएम को ज्ञापन
कन्नौज। मां गंगा सेवा संस्थान ने अध्यक्ष अंकुर तिवारी ने सदस्यों के साथ अध्यक्षता में गुरुवार को डीएम जगदीश प्रसाद को गंगा घाट पर सफाई कराने के संबंध में ज्ञापन सौंपा। कहा कि गंगा घाट पर मवेशियों के शव पडे़ हुए हैं, जिससे वहां रह रहे पुजारियाें के लिए स्नान करने की समस्या बनी हुई है। बताया कि सावन का माह चल रहा है। यह कांवरिये पहले गंगा घाट पर स्नान कर वहां से जल भरते हैं और उसी जल से शहर के ऐतिहासिक मंदिर बाबा गौरीशंकर का जलाभिषेक करते हैं। यदि समय रहते सफाई न कराई गई तो कांवरियों को दिक्कत होगी।
मां गंगा सेवा संस्थान के अध्यक्ष अंकुर तिवारी का कहना है कि उनके संगठन के सदस्य माह में दो से तीन बार सफाई करने पहुंचते हैं। वहां कूड़ेदान रखने की व्यवस्था कराई है, लेकिन भक्ताें को भी इस संबंध में जागरूक होना पड़ेगा।
कोट
मवेशी के शवों फंसे जैसा मामला संज्ञान में नहीं है, प्रशासन की ओर से घाट पर सफाई कराई जाती है। अभी गुरु पूर्णिमा के मौके पर भी सफाई कराई गई थी। गंदगी फैलाने वालों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी। - जगदीश प्रसाद (डीएम, कन्नौज)