तालग्राम। गठिया रोग के बुजुर्ग ही नहीं बल्कि युवा भी शिकार हो रहे हैं। सीएचसी की ओपीडी में रोजाना 10 फीसदी मरीज गठिया की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों ने विश्व गठिया दिवस पर बताया कि जीवनशैली को संतुलित बनाकर इस बीमारी से बचा जा सकता है।
सीएचसी में हुए कार्यक्रम के दौरान डाॅ. योगेश कुमार ने बताया कि गठिया का सबसे अधिक प्रभाव घुटनों में और इसके बाद कूल्हे की हड्डियों पर पड़ता है। इससे बदन में दर्द और अकड़न महसूस होती है। कभी-कभी उनके हाथों, कंधों और घुटनों में सूजन और दर्द रहता है। ऐसे लोगों को अर्थराइटिस की समस्या हो सकती है।
अर्थराइटिस जोड़ों की सूजन है। बुजुर्गों के साथ युवा भी गठिया से परेशान हो रहे हैं। सामान्य स्थिति में आस्टियो अर्थराइटिस 50 वर्ष की उम्र के बाद होता है। यह शरीर पर निर्भर करता है कि जोड़ों को कितना और किस तरह से इस्तेमाल किया गया है। अर्थराइटिस के लक्षण आमतौर पर बढ़ती उम्र के साथ विकसित होते हैं, लेकिन यह अचानक भी समस्या बन सकते हैं। इसके अलावा, गलत तरीके से अधिक देर तक झुककर काम करना, सिर पर नियमित तौर पर वजन उठाना, झुककर कोई वजन उठाना, कंप्यूटर के सामने गलत तरीके से घंटों बैठे रहना, मोबाइल का अधिक इस्तेमाल करना, गर्दन झुकाकर घंटों काम करने से भी गठिया की शिकायत होती है।
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इनसेट-
ऐसे करें बचाव
- जंक फूड से तौबा करें, रोजाना सैर करें।
- धूम्रपान और शराब का सेवन न करें, यह हड्डियों को कमजोर बनाता है।
- साइकिलिंग करके हड्डियों को मजबूत बनाएं।
- रोजाना संतुलित आहार लें।