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मिलावटखोरों पर ढीला शिकंजा, दांव पर सेहत

Thu, 14 May 2015 12:16 AM IST
अमर उजाला कन्नाैैज
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कहीं पिसी धनिया में घोड़े की लीद तो कहीं खाद्य तेलों में चर्बी का प्रयोग। ज्यादा कमाई में चक्कर में जिले में मिलावटखोरी का धंधा चरम पर है। ऐसे में लोगों की सेहत रामभरोसे है। वहीं खाद्य पदार्थों की जांच के लिए बनी टीमों की लापरवाही और कम स्टाफ मिलावट के धंधे को रोकने के लिए नाकाफी है।
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इसके बावजूद छापामार टीम ने सैंपल भर भी लिए तो उनकी जांच में सालों लग जाते हैं। कई बार तो रिपोर्ट तक नहीं आती। इसके चलते जिले में मिलावटखोरी का धंधा दिन-दूनी और रात चौगुनी गति से पांव पसार रहा है। जिले के खाद्य सुरक्षा कार्यालय की लचर कार्यप्रणाली से आपको रूबरू करा रहे हैं योगेंद्र मिश्रा।

केस : एक
31 दिसंबर 2011 को तिर्वा के मोहल्ला सुभाष नगर निवासी गुंजेश बाथम के जनरल स्टोर पर छापा पड़ा। शक होने पर टीम ने हल्दी पाउडर का नमूना लिया। इसकी गुणवत्ता जांचने के लिए सैंपल लखनऊ स्थित लैब भेजा गया। तब से सवा तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन सैंपल की रिपोर्ट ही नहीं आई। विभाग ने कई बार रिमाइंडर भेजा लेकिन ऊपर से कोई जवाब नहीं आया।
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केस : दो
27 अप्रैल 2013 को छिबरामऊ के मोहल्ला बजरिया स्थित नरेश कुमार की दुकान पर टीम ने छापा मारा। इस दौरान गुलाब जामुन बनाने वाले पाउडर की स्थिति संदिग्ध समझ आई। इसकी गुणवत्ता जांचने के लिए सैंपल लखनऊ स्थित विभागीय लैब भेजा गया। तब से लेकर आज तक सैंपल के फेल या पास होने की रिपोर्ट नहीं आई। दो साल बाद भी स्थिति जस की तस है।

केस : तीन
24 मई 2014 को छिबरामऊ के बजरिया में नरेश की दुकान पर छापा मारने के लिए विभागीय टीम पहुंची। जांच पड़ताल के बाद दुकान से धनिया पाउडर का सैंपल भरकर जांच के लिए लखनऊ भेजा गया। इसकी रिपोर्ट अब तक नहीं आ सकी है, जबकि विभागीय स्तर से बार-बार रिमाइंडर भेजे जा रहे हैं। जिन अफसरों ने सैंपल भेजे थे, उनके तबादले भी हो गए पर रिपोर्ट नहीं आई।

जिले में खाद्य एवं सुरक्षा कार्यालय मकरंदनगर में संचालित मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय परिसर के एक कमरे में बना है। यहां दर्ज आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015 के जनवरी माह में 9 सैंपल भरकर जांच के लिए लखनऊ भेजे गए। इनमें से अब तक पांच की ही रिपोर्ट आ सकी है। इनमें से दो नमूने फेल हो गए। जबकि तीन पास हुए। बचे चार सैंपल का क्या हुआ। इसका जवाब किसी के पास नहीं है। वजह लैब से रिपोर्ट ही नहीं आई।

फरवरी माह में 19 सैंपल लैब भेजे गए थे। इनमें से मात्र दो की ही जांच रिपोर्ट आ सकी। ये दोनों सैंपल पास निकले, जबकि 17 सैंपल की रिपोर्ट अब तक नहीं आई है। मार्च में 8 नमूने भेजे गए, लेकिन जांच रिपोर्ट इनमें से किसी की नहीं आई। अप्रैल महीने में भेजे गए 6 नमूनों की रिपोर्ट आने का भी विभाग को इंतजार है। मई महीने में अब तक 6 नमूने जांच को भेजे जा चुके हैं।

सूत्रों की मानें तो नमूने भरने तक को विभाग की सक्रियता नजर आती है। इसके आगे की कार्रवाई अटक जाती है। कई-कई महीने तक नमूनों की जांच रिपोर्ट न आने के कारण मिलावटखोरों पर कार्रवाई नहीं हो पाती है। ऐसे में उनके हौसले बुलंद हैं। विभागीय अधिकारी भी नाम न छापने की शर्त पर स्वीकार करते हैं कि सैंपल की जांच रिपोर्ट आने में विलंब होने के कारण कार्रवाई की प्रक्रिया बाधित होती है।

एक नजर में स्टाफ
कन्नौज में जिला अभिहीत अधिकारी का पद रिक्त पड़ा है। कानपुर के अभिहीत अधिकारी सैय्यद शहनवाज हैदर के पास यहां का अतिरिक्त चार्ज है। वह महीने में दो-चार बार ही आ पाते हैं। इस दौरान कागजी फाइलों पर दस्तखत व वेतन बिल तैयार कराने में ही समय खर्च हो जाता है। वहीं मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी कार्यरत हैं, जबकि तिर्वा तहसील क्षेत्र के लिए खाद्य सुरक्षा निरीक्षक का पद लंबे समय से रिक्त है। तिर्वा का चार्ज कन्नौज तहसील के अफसर को देकर काम चलाया जा रहा है।

मिलावटखोरी रोकने के लिए लगातार छापामार अभियान चलाया जाता है। मिलावटी वस्तुओं को नष्ट भी कराया जाता है। जहां गुणवत्ता संदिग्ध नजर आती है। वहां सैंपल भरकर जांच के लिए लखनऊ भेजे जाते हैं। जांच रिपोर्ट समय पर भेजने के लिए लैब को लगातार रिमाइंडर भेजे जाते हैं। जनपद स्तर पर मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं हो रही है।
अजीत कुमार, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी

कार्रवाई की तैयारी शुरू
विभागीय कार्यालय के अनुसार जनवरी में फर्रुखाबाद चौराहा जीटी रोड छिबरामऊ के पास नार्विनदास गुप्ता के यहां रिफाइन सोयाबीन का सैंपल भरा गया था, जिसकी टेस्टिंग रिपोर्ट 5 मई को आई है। इसमें नमूना फेल मिला है। इस मामले में कानूनी कार्रवाई के लिए लिखापढ़ी शुरू कर दी गई है।

इसी तरह भूरे सिंह निवासी छिबरामऊ के कलेक्शन सेंटर से दूध का सैंपल लिया गया था। मिक्स मिल्क का सैंपल जांच में फेल हो गया। यह सैंपल 29 जनवरी को लिया गया था, इसकी रिपोर्ट एक मई को आई है। इस मामले में भी नोटिस जारी कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। मुकदमा एडीएम व सीजेएम कोर्ट में दायर किए जाएंगे।
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