कन्नौज। जीवनदायिनी 108 और 102 नंबर एंबुलेंस में ऑक्सीजन नहीं है। इससे गंभीर हालत में रेफर मरीज रास्ते में ही ऑक्सीजन के अभाव में दम तोड़ रहे हैं। इसके बाद भी प्रशासन ने इन एंबुलेंसों में ऑक्सीजन की कमी दूर नहीं कराई है।
जिले में संचालित सरकारी एंबुलेंस ऑक्सीजन के अभाव में शव वाहन बनते जा रहे हैं। तमाम प्रयास के बाद भी इन संचालित एंबुलेंस में ऑक्सीजन की समस्या दूर नहीं की जा सकी है।
मरीजों को एंबुलेंस तो मिल जाती है, लेकिन ऑक्सीजन की कमी होने पर एंबुलेंस में उसको ऑक्सीजन नहीं मिलती है। इससे मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। लगभग एक पखवारे से एंबुलेंस ऑक्सीजन की समस्या से जूझ रही हैं।
जिले में एंबुलेंस पर एक नजर
- 108 एंबुलेंस 24
- 102 एंबुलेंस 23
- एलएस एंबुलेंस चार
एंबुलेंस संचालन की स्थिति
जिले में कोरोना संक्रमित गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए 108 नंबर वाली 12 एंबुलेंस लगाई हैं। कोरोना संक्रमित मरीज की हालत बिगड़ने पर उसे कोविड एल टू अस्पताल मेडिकल कॉलेज पहुंचाती हैं। इसी तरह 12 एंबुलेंस आम मरीजों के लिए हैं। किसी मरीज का फोन आने पर 108 नंबर एंबुलेंस यदि मौजूद हुई तो मौके पर पहुंचती है।
यदि किसी मरीज को लेने गई है तो वह नहीं मिलती है। इसी तरह एलएस की चार एंबुलेंस में दो एंबुलेंस को कोविड मरीजों के लिए लगाया गया है। इससे मरीज को कानपुर या सैफई के अस्पताल में भेजा जाता है। इनमें ऑक्सीजन की पूरी तरह से व्यवस्था की गई है। दो बची एलएस एंबुलेंस को वीआईपी के लिए सुरक्षित रखा गया है।
जुगाड़ से चलाया जा रहा काम
जिले में संचालित एंबुलेंस में ऑक्सीजन की कमी जुगाड़ से पूरी की जा रही है। यदि किसी तरह एक सिलेंडर मिला तो उसे एक एंबुलेंस में लगाया जाता है। खास बात यह है कि ऑक्सीजन होने के बाद भी एंबुलेंस का एमटी तब तक मरीज को ऑक्सीजन नहीं देता जब तक उसकी हालत और खराब नहीं हो जाती।
दो दिन में होगा समाधान
एंबुलेंस के जिला प्रभारी विकास पटेल का कहना है कि सरकारी एंबुलेंस में ऑक्सीजन की समस्या का समाधान दो दिन में हो जाएगा। इसके लिए सीएमअओ को पत्र लिखा गया है। उन्होंने आक्सीजन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।