कन्नौज। सरकार आयुर्वेद को बढ़ावा देने के प्रयास में है। लेकिन, जिले में आयुर्वेदिक चिकित्सीय सेवाएं बदहाल हैं। जिले के सात आयुर्वेदिक और यूनानी अस्पतालों में डॉक्टरों की तैनाती नही है। यहां फार्मासिस्ट मरीजों को दवाएं दे रहे हैं।
18 आयुर्वेदिक और तीन यूनानी अस्पताल संचालित हैं। जिला मुख्यालय पर मां फूलमती देवी मंदिर परिसर, दलापुर्वा, चियासर, बारामऊ सरैया, कीरतपुर, फत्तेहपुर जसोदा, जलालपुर पनवारा, रामाश्रम, गुरसहायगंज, सराय प्रयाग, मढ़पुरा, किसई जगदीशपुर, कसावा, सिकंदरपुर, सौरिख, खडिनी, भुन्ना और जसपुरापुर में आयुर्वेदिक अस्पताल हैं।
वहीं जनखत, रूरा और समधन कस्बा में यूनानी अस्पताल हैं। जिसमें कन्नौज शहर, गुरसहायगंज, कसावा, किसई जगदीशपुर, जसपुरापुर और जनखत में आयुर्वेद डॉक्टरों की तैनाती नहीं है। सिर्फ फार्मासिस्ट मरीजों को दवाएं देते हैं। जिले में 21 डॉक्टरों के सापेक्ष 14 की तैनाती है।
अधिकांश अस्पताल जर्जर हालत में किराए के भवनों में संचालित हैं। बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के चलते मरीजों को आयुर्वेदिक चिकित्सीय लाभ नहीं मिल पा रहा है।
आयुर्वेद यूनानी नोडल अधिकारी डॉ. देवेंद्र सिंह का कहना है कि डॉक्टरों की कमी है। शासन को डॉक्टरों की तैनाती के लिए पत्र लिखा गया है। जल्द कमियां दूर होंगी।
नहीं मिल रहा बेहतर उपचार
चचियापुर निवासी गुरुप्रसाद का कहना है कि वह आयुर्वेद उपचार पर भरोसा करते हैं, लेकिन नजदीक के दलापुर्वा आयुर्वेदिक अस्पताल में डॉक्टरों की तैनाती नहीं है। इससे फार्मासिस्ट मरीजों को बेहतर उपचार नहीं मिल पा रहा है।
निजी डॉक्टरों से लेनी पड़ती दवा
तालग्राम निवासी गरीब दास का कहना है कि आयुर्वेदिक सरकारी अस्पतालों में दवाओं की हमेशा कमी रहती है। इससे वह निजी आयुर्वेदिक डॉक्टर से दवा लेते हैं। आयुर्वेदिक दवाओं से बीमारी जड़ से समाप्त हो जाती है।