गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले गरीबों को
सुरक्षित और सुविधाजनक आशियाना मुहैया कराने के इरादे से चलाई जा रही
इंदिरा आवास योजना इस साल भी लेटलतीफी का शिकार हो गई है। अभी तक 4,471
इंदिरा आवासों के निर्माण की योजना थी, लेकिन वित्तीय वर्ष 15-16 के बीते
नौ महीने में करीब 1188 आवासों का ही बजट आ सका है।
इससे अब मार्च माह
के अंत तक समस्त इंदिरा आवास पूरे होने के आसार नहीं हैं। सरकारी मशीनरी की
पंचायत चुनाव की व्यस्तता का खामियाजा अब ग्रामीण भुगत रहे हैं। ज्ञात हो
कि जिले के आठ विकास खंडों में इंदिरा आवास योजना चल रही है। इस योजना के
तहत पात्र पाए जाने वाले परिवार के महिला एवं पुरुष मुखिया को 70 हजार
रुपये आवास निर्माण के लिए दिए जाते हैं।
इंदिरा आवास के लिए मिलने वाले 70
हजार रुपये प्रति आवास के बजट में 75 फीसदी धनराशि केंद्र सरकार की होती
है। 25 फीसदी बजट प्रदेश सरकार देती है। इस तरह 17,500 रुपये प्रदेश सरकार व
52,500 रुपये का बजट भारत सरकार देती है। आवास के निर्माण के लिए दो
किश्तों में धनराशि दी जाती है।
पहली किश्त में 35 हजार और दूसरी किश्त में
भी 35 हजार रुपये दिए जाते हैं। ज्ञात हो कि इंदिरा आवास बनाने के लिए
लाभार्थी को नगद भुगतान नहीं किया जाता है, बल्कि लाभार्थी के खाते में
सीधे रुपये पहुंचते हैं, जिसे वह निकालकर आवास खुद बनवाता है।
इसके अलावा
जब लाभार्थी पहली किश्त को खर्च करके नींव और दीवारें बनाकर खड़ी कर लेता
है तो ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव स्थलीय निरीक्षण करके रिपोर्ट खंड विकास
अधिकारी को भेजते हैं। बीडीओ के स्तर से विकास भवन स्थित कार्यालय में
परियोजना निदेशक डीआरडीए और मुख्य विकास अधिकारी के पास पहली किश्त का
उपभोग लाभार्थी द्वारा कर लेने की रिपोर्ट भेजी जाती है।
बीडीओ की संस्तुति
पर उच्चाधिकारियों की अनुमति के बाद लाभार्थी के खाते में दूसरी किश्त की
धनराशि पहुंचती है। चालू वित्तीय वर्ष में यह योजना कछुआ गति से रेंग रही
है। यही वजह है कि लाभार्थी दर-दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर हैं। कभी
वे विकास भवन के चक्कर लगाते हैं, तो कभी ब्लाकों में पहुंचकर बजट आवंटन
के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं।
उधर, इस बाबत परियोजना निदेशक एके सिंह
की मानें तो इंदिरा आवास योजना को प्राथमिकता से लिया गया है। जिन लोगों को
पहली किश्त मिल गई है, उनके आवासों का निर्माण निर्धारित समय अवधि में
पूर्ण कराने के लिए सभी ब्लाकों के बीडीओ को पत्र लिख दिया गया है।
बताया
कि धनराशि का आवंटन सीधे शासन स्तर से लाभार्थी के खाते में भेजा जाता है।
उन्होंने बताया कि जनपद स्तर से लाभार्थियों को चुनकर ब्योरा शासन को भेजा
जा चुका है। जल्द ही समस्त लाभार्थियों को पहली किश्त का रुपये मिल जाएंगे।
उन्होंने कहा कि योजना के क्रियान्वयन में तेजी के लिए पुरजोर प्रयास किए
जा रहे हैं।
ज्ञात हो कि बीते वित्तीय वर्ष में लक्ष्य के अनुसार
शत-प्रतिशत लाभार्थियों का चयन हो गया था। विकास भवन के अफसरों की मानें तो
वित्तीय वर्ष 14-15 में दूसरी किश्त का बजट कई महीने विलंब से मिला था। इस
वजह से 67 आवास अभी अपूर्ण हैं। इन्हें पूरा कराने के लिए खंड विकास
अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। जनवरी अंत तक ये सारे आवास भी पूर्ण
करा लिए जाएंगे।