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Kannauj News: पान मसाला कंपनियों पर नए नियम से इत्र कारोबारियों को झटका

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कन्नौज। पान मसाला पर लागू हुए नए नियम से नगर के इत्र कारोबारियों को तगड़ा झटका लगा है। गुटखा कंपनियों पर शिकंजा कसने से खुशबू की मांग काफी कम हो गई है। वहीं बाजार में मंदी को देखते हुए कारोबारियों ने हाथ पीछे खींच लिए हैं। इससे कई कारखाने नाममात्र के लिए चल रहे हैं, जिससे गुलाब फूल काफी सस्ता हो गया है। उधर, अतर्स एंड परफ़्यूमर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन त्रिवेदी का कहना है कि नये नियमों से इत्र के व्यापार में 30 फीसदी की गिरावट हुई है।
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पान मसाला पर फरवरी से स्वास्थ्य और सुरक्षा उपकर के रूप में नई लेवी लागू की गई है, जो 40 फीसदी जीएसटी के अतिरिक्त है। यह उपकर उत्पादन क्षमता पर आधारित है, जिसका उद्देश्य टैक्स चोरी रोकना और सिगरेट, पान मसाला जैसे हानिकारक पदार्थों की खपत कम करना है। नई लेवी के कारण पान मसाला, गुटखा और संबंधित तंबाकू उत्पादों की कीमतों में वृद्धि हुई है। टैक्स दर 40 फीसदी जीएसटी के अतिरिक्त, अब उत्पादक क्षमता के आधार पर स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर लगाया गया है। इससे पान मसाला कंपनियों ने उत्पादन काफी कम कर दिया है।
इसका सीधा असर इत्र कारोबारियों पर पड़ रहा है। नगर से प्रतिमाह करोड़ो रुपये की रूह, खुशबू पान मसाला कंपनियों को जाती थी। वर्तमान में जिसकी खपत इस समय 20 से 30 प्रतिशत ही रह गई है। वहीं पश्चिमी देशों में तनाव व युद्ध जैसे हालात बनने से सऊदी अरब, कुवैत आदि देशों में इत्र निर्यात पर ब्रेक लग गया है। ऐसे में इत्र कारोबारियों को दोहरा झटका लगा है। मांग कम होने के कारण इत्र कारोबारियों ने उत्पादन भी घटा दिया है। कारखानों में काम कम होने से यहां लगे मजदूरों का खर्च निकलना भी मुश्किल हो रहा है।
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लकड़ी भी हो गई महंगी
यहां पर आसवन विधि से इत्र निकाला जाता है। भारी भरकम डेग में फूलों को भरकर भट्टी पर पकाया जाता है, इसके लिए बबूल की लकड़ी को सबसे उत्तम ईंधन माना जाता है। पश्चिमी देशों में तनाव के बाद बढ़ी गैस की किल्लत से लकड़ी के दाम भी बढ़ गए हैं। इस कारोबारियों की मानें तो पहले जो लकड़ी छह रुपये किलो में मिल जाती थी, अब वह आठ से नौ रुपये किलो पड़ रही है, इससे कारोबार प्रभावित हुआ है।
फोटो:37: इत्र कारोबारी आशीष पांडेय।
जानबूझकर घटाया उत्पादन
पश्चिमी देशाें में व गुटखा कंपनियों में खपत काफी कम हो गई है, इससे उत्पादन भी कम करना पड़ा है। इस कारण कारखाना ठीक से नहीं चल पा रहा है। इस समय उनके यहां केवल एक डेग ही चल रही है।
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-आशीष पांडेय, इत्र कारोबारी
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