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कन्नौज आए थे नेताजी, इंकलाब की बोलियों से गूंजा था शहर

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कन्नौज। आजादी के आंदोलन में शहर के रणबांकुरों का बड़ा योगदान रहा है। प्राचीन सिद्धपीठ मां फूलमती देवी मंदिर में वर्ष 1940 में सुभाष चंद्र बोस आए थे। उनसे प्रेरित होकर कई युवा आजाद हिंद फौज में शामिल हुए। इसके बाद अंग्रेजों को धूल चटाने के लिए आजादी की लड़ाई में शरीक हुए थे।
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नेता जी ने कन्नौज आकर आजादी के परवानों में जोश भरा था। ये वह दौर था जब सुभाष चंद्र बोस ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से त्याग पत्र दिया था। इसके बाद देश में महात्मा गांधी के नरम दल और सुभाष चंद्र बोस के गरम दल में जुड़कर लोग अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन में शामिल हो रहे थे। शहर के इतिहासकार और साहित्यकार डॉ. जीवन शुक्ल ने बताया कि महात्मा गांधी के कहने पर फर्रुखाबाद में जवाहर लाल नेहरू और उनकी पत्नी कमला नेहरू ने जनसभा को संबोधित किया था।
दूसरी ओर कन्नौज शहर में सुभाष चंद्र बोस ने मां फूलमती देवी मंदिर में सभा की थी। सुभाष चंद्र बोस को देखने और सुनने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ा था। नेताजी के इंकलाब बोलते ही पूरा शहर इस नारे से गूंज उठा था। इस दौरान उन्होंने आजाद नवयुवक संघ और फारवर्ड ब्लॉक का स्थानीय स्तर पर गठन किया था। आगे चलकर दोनों संगठनों का आजाद हिंद फौज में विलय हुआ। इसमें शामिल शहर के कई युवाओं ने नेताजी के साथ कदम से कदम चलकर आजादी दिलाने में योगदान दिया था।
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लिपिक गंगा दयाल को दी थी हीरोज ऑफ कन्नौज की उपाधि
ब्रिटिश अफसरों को चकमा देेकर जनसभा को सफल बनाने की जिम्मेदारी सुशीला देवी गर्ल्स इंटर कॉलेज में तैनात लिपिक गंगा दयाल त्रिपाठी को दी गई थी। सुभाष चंद्र बोस के बेहद करीबी गंगा दयाल त्रिपाठी ने प्रतीकात्मक तीन स्थानों पर जनसभा की थी। जबकि मुख्य जनसभा मां फूलमती मंदिर में हुई। इस दौरान नेताजी ने गंगा दयाल त्रिपाठी को हीरोज ऑफ कन्नौज की उपाधि देकर सम्मानित किया था। इस मौके पर नेताजी ने कहा कि क्रांति की ज्वाला को धीमी मत पड़ने देना। जल्द अंग्रेजों को खदेड़ दिया जाएगा।
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