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नीरज मिश्रा हत्याकांड की फाइल से छंटने लगी धूल, मुख्यमंत्री ने विधानसभा में उठाया था मुद्दा

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नीरज मिश्रा (फाइल फोटो)। - फोटो : CHIBRAMAU
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छिबरामऊ(कन्नौज)। मानसून सत्र के तीसरे दिन 22 अगस्त को विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कसाबा के भाजपा कार्यकर्ता नीरज मिश्रा हत्याकांड को उठाने के बाद शासन के विशेष सचिव ने छिबरामऊ पुलिस से रिपोर्ट तलब कर ली है। इस प्रकरण में जमानत पर रिहा चल रहे सभी आरोपियाें से जुड़ी जानकारियां मांगी है।
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शासन के विशेष सचिव अटल कुमार राय ने पुलिस महानिदेशक अपराध शाखा एवं एसपी कन्नौज को पत्र भेजा है। इसमें साल 2004 में कसाबा गांव में हुए नीरज मिश्रा हत्याकांड को लेकर रिपोर्ट मांगी है। इस मुकदमे की अभी तक की स्थिति उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है। इस मामले में सितंबर 2014 में अशोक कुमार व अवनीश कुमार पुत्रगण हवलदार सिंह, मुन्नू सिंह पुत्र रामशरन सिंह, पप्पू पुत्र तुलसी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। मार्च 2015 में सभी आरोपी जमानत पर रिहा हो गए। आरोपियों के जमानत पर होने पर सभी की जमानत के आधार सहित विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रभारी निरीक्षक शैलेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि शासन से मांगे गए सभी ब्योरों की रिपोर्ट बनाकर शीघ्र ही भेज दी जाएगी।
जमानत पर छूटने के बाद की थी मारपीट
नीरज मिश्रा हत्याकांड में चार आरोपियों को सितंबर 2014 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई। सभी आरोपी मार्च 2015 में जमानत पर रिहा हो गए। मृतक नीरज मिश्रा के भाई सुनील कुमार मिश्रा ने बताया कि 18 अगस्त 2017 को अशोक कुमार व अवनीश कुमार पुत्रगण हवलदार सिंह, मुन्नू सिंह पुत्र रामशरन सिंह व पप्पू पुत्र तुलसी उसके घर पर आए। बड़े भाई मुनीष मिश्रा पर मामले की पैरवी करने की बात कहते हुए गालीगलौज कर मारपीट की। शोरगुल सुनकर गांव के लोग आ गए तो यह लोग जान से मारने की धमकी देते हुए चले गए। पुलिस ने इस मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया है।
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भाजपा सरकार बनने के बाद नीरज के भाई को मिला था गनर
साल 2017 में प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद नीरज मिश्रा के बड़े भाई व भाजपा के जिला उपाध्यक्ष मुनीष मिश्रा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास गए थे। उन्होंने अपनी जान का खतरा बताया था। इस पर मुख्यमंत्री ने गनर उपलब्ध करा दिया था। उस समय भी प्रदेश सरकार ने कन्नौज पुलिस से इस पूरे प्रकरण की रिपोर्ट मांगी थी। इस रिपोर्ट शासन को भेज भी दी गई थी।
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