छिबरामऊ। पिछले 43 साल बाद चकबंदी प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद नंदलालपुर के बाशिंदों को डीएम ने मालिकाना हक से संबंधित जोत चकबंदी आकार पत्र 45 का वितरण किया। अभी तक भूमि होते हुए भी यहां के किसान भूमिहीन के समान थे। इन्हें अन्य गांव के किसानों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था।
डीएम शुभ्रांत शुक्ला ने नंदलालपुर गांव पहुंचकर पंथरा के राजवीर सिंह, नंदलालपुर के नागेंद्र सिंह, दिनेश चंद्र, रामशरन सिंह, मोती सिंह, बलवीर सिंह व मनोज समेत 26 किसानों को जोत चकबंदी आकार पत्र 25 का वितरण किया। एसओसी मोहनलाल ने बताया कि गांव सभा के 212 किसानों को शुक्रवार व शनिवार तक आकार पत्र वितरित कर दिया जाएगा। इसके बाद प्रस्ताव भेजकर धारा 52 का प्रकाशन करा दिया जाएगा। सभी किसान पूर्ण रूप से जमीन के हकदार बन जाएंगे। 99 प्रतिशत चकबंदी का काम पूरा हो चुका है। अब अगर त्रुटिवश कोई कमी है तो किसान सीओ चकबंदी के पास अपनी आपत्ति दर्ज कराकर त्रुटि को दुरुस्त करा सकते हैं। इस दौरान एडीएम, एसडीएम उमाकांत तिवारी, सीओ चकबंदी सुभाष चंद्र वर्मा, चकबंदी कर्ता अरुण कुमार, लेखपाल रज्जन बाबू समेत कई ग्रामीण मौजूद रहे।
1980 में शुरू हुई थी नंदलालपुर गांव में चकबंदी
छिबरामऊ तहसील के नंदलालपुर गांव में साल 1980 में चकबंदी प्रक्रिया शुरू हुई थी। 1990 के देशव्यापी आरक्षण आंदोलन के दौरान हुए अग्निकांड में 35 गांव के राजस्व अभिलेख जल कर राख हो गए थे। उसके बाद से चकबंदी प्रक्रिया अधर में लटक गई थी। 43 साल बाद चकबंदी पूरी होने पर जोत चकबंदी आकार पत्र 45 मिलने के बाद किसानों के चेहरों की खुशी देखते ही बन रही थी।